नई दिल्ली : सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाला मुख्य दल तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) आज लोकसभा में इस पर चर्चा की शुरुआत करेगा और अध्यक्ष ने उसे बोलने के लिए 13 मिनट का समय दिया है. पार्टी की ओर से जयदेव गल्ला पहले वक्ता होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह ट्वीट कर कहा कि आज का दिन संसदीय लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद में इस मौके पर विस्तृत बहस होगी और सांसद रुकावटें पैदा नहीं करेंगे. Also Read - प्रधानमंत्री की दीये जलाने की अपील भाजपा का छुपा एजेंडा: एचडी कुमारस्वामी

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को प्रस्ताव पर अपने विचार रखने के लिए 38 मिनट का समय दिया गया है. कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी और सदन में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इस पर बोल सकते हैं. अन्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल (बीजद), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को क्रमश: 29 मिनट, 27 मिनट, 15 मिनट और नौ मिनट का समय दिया गया है. सदन में बहुमत वाली सत्तारूढ़ भाजपा को चर्चा में तीन घंटे और 33 मिनट का समय दिया गया है.

आज लोकसभा में न प्रश्नकाल होगा और न ही लंच ब्रेक होगा. सत्तापक्ष को पूरा भरोसा है कि अविश्वास प्रस्ताव बुरी तरह गिर जाएगा. भाजपा को ये भी भरोसा है कि ये मौका उसे 2019 के चुनाव अभियान के लिए लांचपैड उपलब्ध करवा सकता है. वहीं, विपक्ष ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है और उसकी मंशा मत विभाजन कराकर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा वोटिंग के जरिए सरकार की किरकिरी कराने की होगी. 18 जुलाई को स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इसे समर्थन देने का ऐलान किया है.

भाजपा को उम्मीद है कि अन्नाद्रमुक, बीजद और टी आर एस जैसे क्षेत्रीय दल या तो उसका समर्थन करेंगे या अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से अनुपस्थित रहेंगे जिनके पास 37, 19 और 11 सदस्य हैं. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सहित भाजपा के शीर्ष नेताओं ने अपने सहयोगियों और साथ ही अन्य दलों से भी संपर्क किया है. अमित शाह ने शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे से भी बात की. हालांकि उसने अपने पत्ते अभी तक नहीं खोले हैं. संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने विश्वास जताया कि सरकार को नए दलों से समर्थन मिलेगा. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने संकेत दिया कि हो सकता है कि उनकी पार्टी अन्नाद्रमुक अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करे. वहीं, बीजेडी और टी आर एस ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं.