आज यानी 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस है. इसे बांग्लादेश के निर्माण के लिए 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में मिली जीत के जश्न के रूप में मनाया जाता है. 71 के जंग के दौरान आज ही दिन भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर हमला किया था, जिसमें बंदरगाह पूरी तरह तबाह हो गया था. इस पूरे अभियान को भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ नाम दिया था. इस ऑपरेशन की कामयाबी ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी और भारत युद्ध में विजयी हुआ. Also Read - भारत ने US से लीज पर लिए बेहद खतरनाक Predator Drones, चीन से निपटने को LAC पर हो सकती है तैनाती

वैसे तो 1947 में देश के बंटवारे के तुरंत बाद 1948 में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर जंग हुआ. इसके बाद 1965 में फिर दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ. लेकिन 1971 की लड़ाई इससे अलग थी. इस युद्ध में पाकिस्तान के खुद दो टुकड़े हो गए और बांग्लादेश के रूप में अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर एक नए राष्ट्र का उदय हुआ. इसके साथ ही पहली दफा दोनों देश की नौसेनाओं ने युद्ध में भाग लिया. इससे पहले के दोनों युद्धों में नौसेना शामिल नहीं हुई थी. Also Read - Indira Gandhi Birth Anniversary: इंदिरा के इन 6 फैसलों को पढ़ बताइए... आखिर कौन है आजाद भारत का सबसे बड़ा नेता

कैसे हुआ ऑपरेशन
पाकिस्तान की सेना ने 3 दिसंबर को भारत के खिलाफ जंग छेड़ दिया. उसने पाकिस्तान की सीमा से लगे इलाकों में हवाई हमले कर दिए. इसी हमले का जवाब देने के लिए ऑपरेशन ट्राइडेंट चलाया गया. इस ऑपरेशन मे पहली बार एंटी शिप मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया. इस ऑपरेशन को चार और पांच दिसंबर को अंजाम दिया गया. इसमें नौसेना ने पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाया था. दरअसल, 1971 में तनाव बढ़ने के साथ ही भारत ने पाकिस्तान की किसी भी नापाक हरकत का जवाब देने की रणनीति बना ली थी. Also Read - भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ एक और जंगी पोत, पूर्णत: स्वदेशी है कवरती

भारत ने पहले ही 3 विद्युत मिसाइल बोट बनवा लिए. दूसरी तरफ पाकिस्तान के पास सीमित क्षमता थी. उसके पास रात में बमबारी करने वाले जहाज नहीं थे. ऐसे में भारत ने इस पूरे ऑपरेशन को रात में अंजाम दिया. इस कार्रवाई में पाकिस्तान के चार पोत तबाह हो गए. इसमें कराची में स्थित पाकिस्तान का हार्बर फ्यूल स्टोरेज भी तबाह हो गया. इसमें भारतीय नौसेना को कोई नुकसान नहीं हुआ. नौसेना की इस शानदार सफलता को जश्न के रूप में मनाया गया और उसके बाद से 4 दिसंबर को नौसेन दिवस मनाया जाने लगा.