नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास कई क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव की स्थिति बरकरार है और 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद यह सबसे बड़ी सैन्य तनातनी का रूप ले सकती है. ऐसे में स्थिति को देखते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को रक्षा प्रमुख (CDS) जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत के अलावा तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ हुई इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख के ताजा हालात का जायजा लिया.Also Read - Nayak Film के 'अनिल कपूर की तरह' यूपी के तीन दिन का CM बना था यह नेता, जानें किन परिस्थितियों में मिली थी जिम्मेदारी

गौरतलब है कि चीनी सैनिकों के साथ बीते दिनों भारतीय सैनिकों की झड़प की खबरें थीं, जिसके बाद दोनों देशों के बॉर्डर पर तनाव की स्थिति है. इसी को लेकर लक्षा मंत्री ने सेना प्रमुखों के साथ बैठक की. मीडिया रिपोर्टस की मानें तो बैठक में तय हुआ है कि चीन के साथ जारी मौजूदा विवाद को बातचीत और डिप्लोमेटिक मोर्चे पर सुलझाया जाएगा. लेकिन, भारतीय सेना जहां पर अभी डटी हुई है वहां रहेगी. इसके अलावा भारत ने जो सड़क निर्माण का काम शुरू किया है, वो पूरी तरह से जारी रहेगा. Also Read - Pankaj Singh's Profile: जानें बिहार में जन्मे, दिल्ली में पढ़े और नोएडा से विधायक पंकज सिंह का सफरनामा

बता दें कि लद्दाख में भारत और चीन आमने सामने हैं. जिसको देखते हुए भारत ने पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में अपनी स्थिति मजबूत की है. इन दोनों विवादित क्षेत्रों में चीनी सेना ने अपने दो से ढाई हजार सैनिकों की तैनाती की है और वह धीरे-धीरे अस्थायी निर्माण को मजबूत कर रही है. कहा जाता है कि क्षेत्र में भारतीय सेना चीन से कहीं ज्यादा बेहतर स्थिति में है. Also Read - रक्षा मंत्री Rajnath Singh के बेटे और Noida से विधायक Pankaj Singh कोरोना वायरस से संक्रमित

गलवान घाटी में दरबुक शयोक दौलत बेग ओल्डी सड़क के पास भारतीय चौकी केएम-120 के अलावा कई महत्वपूर्ण ठिकानों के आसपास चीनी सैनिकों की उपस्थिति भारतीय सेना के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है.