नई दिल्लीः पूर्वी लद्दाख में इन दिनों चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है. चीन सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाता जा रहा है. इस बीच लड़ाकू विमानों की पहली खेप आज अंबाला एयरबेस पर औपचारिक रूप से वायुसेना में शामिल किए जाएंगे. इस दौरान कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh), प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat), फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली, वायुसेना प्रमुख आर के एस भदौरिया (RS Bhadauria) शामिल होंगे. Also Read - नोबल पर डोनाल्ड ट्रंप की नजर, अब भारत-चीन के बीच कराना चाहते हैं मध्यस्थता

वायुसेना के एक प्रवक्ता ने कार्यक्रम को बल के इतिहास का बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर करार देते हुए कहा, ‘कार्यक्रम के दौरान राफेल विमान का औपचारिक अनावरण किया जाएगा. पारंपरिक ‘सर्वधर्म पूजा’ की जाएगी और राफेल और तेजस विमान हवाई करतब दिखाएंगे.’ Also Read - महत्वपूर्ण पहल है पीएम मोदी का ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान: आईएमएफ

राफेल विमानों की खास बातें-
राफेल विमानों का निर्माण फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने किया है. वायुसेना के प्रवक्ता विंग कमांडर इंद्रनील नंदी ने कहा कि राफेल विमानों को बल के 17वें स्क्वॉड्रन में शामिल करने से पहले उन्हें पानी की बौछारों से पारंपरिक सलामी दी जाएगी.

29 जुलाई को पहली खेप के तहत पांच राफेल विमान भारत लाए गए थे. भारत ने लगभग चार साल पहले फ्रांस से 59,000 करोड़ रुपये में 36 राफेल विमान खरीदने का सौदा किया था.
भारतीय वायुसेना में अगले 2 सालों में राफेल के दो स्क्वाड्रन में 36 विमान शामिल होंगे. राफेल का पहला स्क्वाड्रन अंबाला में और दूसरा पश्चिम बंगााल के हाशिमारा में होगा.

गौरतलब है कि भारत सरकार ने साल 2016 में फ्रांस सरकार से राफेल खरीदने का फैसला लिया था. जिसके लिए भारत सरकार ने फ्रांस से 59,000 करोड़ रुपये के 36 राफेल खरीदने का फैसला किया था.

राफेल के 4.5 जनरेशन के विमानों को दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमानों में गिना जाता है. यह दो इंजन वाला मल्टी रोल एयरकाफ्ट है.