मॉस्को: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मास्को में अपने चीनी समकक्ष से मुलाकात नहीं करेंगे. जी हां, मॉस्को में सैन्य परेड के इतर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके चीनी समकक्ष वेई फेंगे के बीच द्विपक्षीय बैठक नहीं होगी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को इस बारे में बताया. Also Read - भारत को मिला अमेरिका का समर्थन, माइक पॉम्पिओ बोले- चीन को भारत ने दिया सही जवाब

भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी पर सोवियत संघ की विजय की 75वीं वर्षगांठ पर मास्को में आयोजित होने वाले एक भव्य सैन्य परेड में भाग लेने और शीर्ष रूसी सैन्य अधिकारियों के साथ वार्ता करने के लिए रूस की तीन दिवसीय यात्रा पर मास्को में हैं. Also Read - कांग्रेस का सवाल- भारतीय सेना LAC पर हमारी ही सरजमी से क्यों हट रही है पीछे, क्या पीएम मोदी के शब्दों के मायने नहीं?

इस यात्रा को लेकर कुछ चीनी प्रोपेगेंडा वेबसाइटों ने दावा किया कि वेई और सिंह मॉस्को में समारोह में हिस्सा ले रहे हैं और पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव को लेकर दोनों के बीच मुलाकात की संभावना है. चीनी मीडिया की खबर के बारे में पूछे जाने पर रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता भारत भूषण बाबू ने कहा, ‘‘हमारे रक्षा मंत्री चीनी रक्षा मंत्री के साथ बैठक नहीं करेंगे.’’ Also Read - उत्तराखंड के मंत्री ने चीनी राष्ट्रपति को रामायण भेजी, कहा- रावण भी ऐसी ही सोच का था, पढ़कर सबक लें

रक्षा मंत्री का रूस का दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया है. अधिकारियों ने कहा कि चीन के साथ सीमा पर गतिरोध चल रहा है लेकिन सिंह रूस के साथ भारत के दशकों पुराने सैन्य संबंधों के कारण दौरे पर गए हैं.

इस बीच केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने रूप से राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने का न्यौता जरूर दे दिया. राजनाथ सिंह ने कहा, “ये हम दोनों देशों के सैन्य बल के बीच दोस्ती की एक मिसाल है. कोरोना महामारी के दौरान ये भारत के किसी अधिकारिक डेलीगेशन की पहली विदेश विज़िट है. हम हमारे PM मोदी के राष्ट्रपति पुतिन को भारत भ्रमण के लिए भेजे गए निमंत्रण पर भी काफी उत्सुक हैं.”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत-रूस संबंध एक ‘विशिष्ट एवं विशेष सामरिक भागीदारी’ है और दोनों देशों के बीच मौजूदा सैन्य अनुबंध बरकरार रहेंगे और कई मामलों को दोनों देश कम समय में आगे लेकर बढेंगे. सिंह ने कहा कि मॉस्को की यह यात्रा कोविड-19 महामारी के बाद किसी भारतीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की पहली विदेश यात्रा है.

रक्षा मंत्री ने यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए, ‘भारत-रूस संबंध एक विशिष्ट और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक भागीदारी है. हमारे रक्षा संबंध इसके महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं.’ सिंह ने रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव के साथ द्विपक्षीय रक्षा संबंधों पर चर्चा की, जो महामारी की पाबंदियों के बावजूद उनसे होटल में मिलने आए थे.

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘दोनों के बीच हुई चर्चा बेहद सकारात्मक रही. मुझे आश्वासन दिया गया है कि दोनों देशों के बीच चल रहे अनुबंधों को कायम रखा जाएगा और न केवल कायम रखा जाएगा बल्कि कई मामलों पर कम समय में आगे भी बढ़ा जाएगा. हमारे सभी प्रस्तावों पर रूस की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. मैं चर्चा को लेकर पूरी तरह संतुष्ट हूं.’ उन्होंने रूस की ओर से भारत को समय पर एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली दिये जाने का संकेत देते हुए यह बात कही.

इस बीच गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद रूस ने मंगलवार को दोनों देशों के बीच मध्यस्थता से इनकार करते हुए कहा कि अपने विवादों को हल करने के लिये दोनों देशों को किसी सहायता की जरूरत नहीं है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की यह टिप्पणी रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के डिजिटल सम्मेलन के बाद आई. विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी भी इस सम्मेलन में शामिल हुए.