नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने एक बड़े फैसले के तहत मंगलवार को 15,935 करोड़ रुपए के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी. इनमें सशस्त्र बलों की शक्ति को और मजबूत करने के लिए 7.40 लाख असॉल्ट राइफल, 5,719 स्नाइपर राइफल और लाइट मशीन गनों की खरीद शामिल है. काफी समय से लंबित प्रस्तावों को रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की बैठक में मंजूरी दी गई. डीएसी रक्षा मंत्रालय की निर्णय लेने वाली शीर्ष इकाई है.Also Read - Philippines का मिलि‍ट्री प्‍लेन क्रैश, 85 लोगों को ले जा रहा व‍िमान लैंडिंग करते हुए हादसे का शिकार, 40 लोग बचाए गए

जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान के साथ बढ़ती दुश्मनी तथा लगभग चार हजार किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा पर कई जगहों पर चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच इन खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में डीएसी ने 15,935 करोड़ रुपए के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी. डीएसी ने सेना के तीनों अंगों के लिए 12,280 करोड़ रुपए की लागत से 7.40 लाख असॉल्ट राइफलों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी. ये राइफलें सरकार संचालित आयुध फैक्टरी और निजी क्षेत्र दोनों के जरिए ‘बाय एंड मेक इंडियन’ श्रेणी के तहत भारत में बनाई जाएंगी. Also Read - रक्षा मंत्रालय ने इंडियन नेवी के लिए 6 पनडुब्बियों के निर्माण को दी मंजूरी, 43,000 करोड़ रुपए होंगे खर्च

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सीमाओं पर तैनात सैनिकों की अभियानगत जरूरतों को प्राथमिक रूप से पूरा करने के लिए 1,819 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से ‘फास्ट ट्रैक’ रूट के जरिए लाइट मशीनगनों (एलएमजी) की ‘आवश्यक मात्रा’ पूरी की जाएगी. बाय एंड मेक (इंडियन) श्रेणी के तहत संतुलित मात्रा में खरीद के लिए एक साझा प्रस्ताव पर प्रक्रिया चल रही है. Also Read - जर्मनी से हवाई मार्ग से आएंगे 23 ऑक्सीजन प्लांट, एक मिनट में होगा 900 किलो का उत्पादन

सीमा पर तैनात सैनिकों को आधुनिक तथा अधिक प्रभावी उपकरणों से लैस करने के लिए पिछले एक महीने में डीएसी ने राइफलों, कार्बाइनों और एलएमजी की खरीद तेज कर दी है. डीएसी ने थलसेना और वायुसेना के लिए 982 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 5,719 स्नाइपर राइफलों की खरीद को भी मंजूरी दे दी. स्नाइपर राइफलों की खरीद ‘बाय ग्लोबल’ श्रेणी के तहत की जाएगी. शुरू में इन हथियारों के लिए गोला-बारूद खरीदा जाएगा और बाद में इनका निर्माण भारत में किया जाएगा.

मंत्रालय ने कहा कि नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए डीएसी ने 850 करोड़ रुपए की लागत से ‘एडवांस्ड टारपीडो डिकॉइ सिस्टम’ (एटीडीएस) की खरीद को भी मंजूरी प्रदान कर दी. मारीच एडवांस्ड टारपीडो डिकॉइ सिस्टम को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने देश में ही विकसित किया है और यह प्रणाली सघन परीक्षण मूल्यांकन पूरा कर चुकी है. मंत्रालय ने कहा, ‘मारीच प्रणाली का विनिर्माण 850 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, बेंगलूरू द्वारा किया जाएगा.’

इससे पहले पिछले शनिवार को रक्षा मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर सहित विभिन्न इलाकों में सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा चाक चौबंद बनाने के लिए सेना को 1,487 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. सेना इस राशि से अपने सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा चुस्त-दुरूस्त करेगी ताकि किसी भी तरह के आतंकी हमलों से उनकी रक्षा की जा सके.

साल 2016 में पठानकोट वायुसेना अड्डे पर आतंकी हमले के बाद लेफ्टिनेंट जनरल फिलिप केंपोस की अध्यक्षता में गठित एक समिति की सिफारिश पर सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा ऑडिट की गई. समिति से कहा गया था कि वह सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए उपाय सुझाए. सुरक्षा ऑडिट के बाद तीनों सेनाओं की कमांड को संशोधित मानक परिचालन प्रक्रिया एसओपी भेजी गई ताकि वे अपने सुरक्षा प्रबंधन को चुस्त करें. पठानकोट हमले के बाद सेना, नौसेना व वायुसेना के कुल 3,000 प्रतिष्ठानों को संवेदनशील चिन्हित किया गया. इसमें 600 की पहचान अतिसंवेदनशील प्रतिष्ठानों के तौर पर की गई है.