नई दिल्लीः पंजाब और हरियाणा में पराली जलाए जाने के बाद बुधवार को दिल्ली एनसीआर की हवा और अधिक प्रदूषित हो गई जिसके बाद लोगों को खुले वातावरण में सांस लेना दूभर हो गया. प्रदूषण इतना ज्यादा था कि इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार की सुबह 11 बजे तक सूर्य के भी दर्शन नहीं हो पाए. राजधानी में वायु प्रदूषण का मुख्य कारणों में एक पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली भी है. माना जा रहा है कि अभी शुक्रवार तक दिल्ली वासियों को इससे राहत नहीं मिल पाएगी.

केंद्र सरकार ने पंजाब और हरियाणा सरकार पर पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कड़े निर्देश भी जारी किए थे लेकिन बावजूद इसके दोनों ही राज्यों में लगातार पराली जलाई जा रही है. एयर क्वॉलिटी इंडेक्स के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली (Delhi) के लोधी रोड इलाके में पीएम 2.5, 500 पर पहुंच गया जो कि खतरनाक की श्रेणी में आता है. इसके अलावा पीएम-10, 379 पर पहुंच गया जो बहुत खराब की श्रेणी में आता है.

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SAFAR की तरफ से मंगलवार को जारी की गई रिपोर्ट कहा गया है कि पिछले 24 घंटों के दौरान पंजाब और हरियाणा में पराली जलने की घटनाएं 1654 से बढ़कर 2577 पहुंच गई हैं. इसके अलावा हवा के बहने की दिशा दिल्ली की तरफ हैं इसलिए प्रदूषण (Pollution) बढ़ रहा है. 1 नवंबर को हवा की दिशा बदल सकती है जिस से प्रदूषण में कमी आ सकती है.

आपको बता दें कि हर साल अक्टूबर और नवंबर के माह में दिल्ली की हवा सांस लेने के लायक नहीं रह जाती. एक तरफ दिवाली में होने वाली आतिशबाजी और दूसरी तरफ किसानों के द्वारा जलाई जाने वाली पराली से वायु मंडल में धुंए की चादर चढ़ जाती जाती है. सरकार कुछ हद तक आतिशबाजी को रोकने में तो कामयाब हुई लेकिन पराली जलाने से रोकने के लिए सरकार के हर प्रयास लगातार फेल हो रहे हैं.