दिल्ली में पटाखों पर रोक बेअसर! CPCB रिपोर्ट ने चौंकाया, जानें बैन के बावजूद क्यों नहीं सुधर रही राजधानी की हवा

राजधानी दिल्ली में दीवाली से पहले पटाखों के बिना ही प्रदूषण गंभीर श्रेणी में देखा जा रहा है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने रिपोर्ट जारी कर असली कारणों के बारे में बताया, साथ ही समाधान भी बताया है.

Published date india.com Published: October 9, 2025 5:09 PM IST
दिल्ली में पटाखों पर रोक बेअसर! CPCB रिपोर्ट ने चौंकाया, जानें बैन के बावजूद क्यों नहीं सुधर रही राजधानी की हवा

हर साल की तरह इस बार भी दीवाली से पहले दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई. हैरानी की बात है कि 2018 से पटाखों पर प्रतिबंध लगने के बावजूद प्रदूषण के स्तर में कोई खास कमी नहीं आई. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से 2024 तक हर दीवाली और उसके अगले दिन हवा की गुणवत्ता लगातार गिरती रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ पटाखे ही नहीं, बल्कि कई और कारण भी हैं जो दिल्ली की हवा को जहरीला बना रहे हैं. इसलिए जरूरत है कि सरकार और एजेंसियां प्रदूषण के सभी कारकों पर मिलकर काम करें, न कि केवल पटाखों पर प्रतिबंध लगाने तक सीमित रहें.

प्रदूषण बढ़ने का असली कारण क्या है?

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि दीवाली के दौरान, सबसे ज्यादा प्रदूषण वाहनों के धुएं और धूल से होता है. इंडियन पल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (IPCA) की डॉ. राधा गोयल बताती हैं कि त्योहार के दिनों में खरीदारी और रिश्तेदारी के सिलसिले में लोग बड़ी संख्या में निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ जाता है. इसके अलावा, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल भी वायु गुणवत्ता को बिगाड़ती है. सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरनमेंट (CSE) की अनुमिता राय चौधरी का कहना है कि दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ पटाखों पर नहीं, बल्कि इन सभी कारकों की रोकथाम के लिए ठोस कार्ययोजना पेश करनी चाहिए.

ग्रीन पटाखे: एक मात्र समाधान

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने “ग्रीन पटाखे” विकसित किए हैं, जिनसे सामान्य पटाखों की तुलना में 30 से 35 प्रतिशत कम प्रदूषण होता है. इन पटाखों में सल्फर और नाइट्रस ऑक्साइड जैसे हानिकारक तत्वों की मात्रा कम होती है और एल्यूमिनियम का इस्तेमाल 50-60 प्रतिशत तक घटा दिया गया है. इन्हें जलाने पर धुएं के साथ पानी की बारीक बूंदें निकलती हैं जो हवा में मौजूद धूलकणों को नीचे गिरा देती हैं.

सबके प्रयास करने से ही सुधरेगी राजधानी की हवा

पूर्व CPCB अधिकारी डॉ. एस.के. त्यागी के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण सिर्फ एक कारण से नहीं होता, बल्कि यह कई स्रोतों का मिश्रण है – वाहनों का धुआं, पराली जलाना, निर्माण कार्य, धूल और मौसम की स्थिति. इसलिए किसी एक पर रोक लगाने से बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा. जरूरत है एक ‘इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान’ की, जिसमें एनसीआर के सभी शहर मिलकर काम करें. नहीं तो दिल्ली की हवा हर साल दीवाली के बाद इसी तरह ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रहेगी.

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