Delhi Blast Case: डॉक्टर्स ने बना रखा था सफेदपोश आतंकवादी नेटवर्क, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने किया 'अंसार इंटेरिम' का पर्दाफाश

गिरफ्तार किए गए चिकित्सकों और उपदेशकों ने पूछताछ करने वालों को बताया कि सक्रिय आतंकवादियों से उनके सभी संपर्क टूट जाने के कारण एक नया समूह बनाने की आवश्यकता उत्पन्न हुई थी.

Published date india.com Published: February 15, 2026 2:42 PM IST
(डॉक्टर उमर ही था मास्टरमाइंड)
(डॉक्टर उमर ही था मास्टरमाइंड)

Delhi Blast Case: दिल्ली में लाल किले के पास पिछले साल हुए कार धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच में ये सामने आया है कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए चिकित्सक 2016 से ही कट्टरपंथी बन चुके थे और उन्होंने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए “अंसार इंटेरिम” नामक एक नया आतंकवादी संगठन बनाया था.

अधिकारियों ने बताया है कि इस मामले की जांच अब राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) कर रही है. जांच में यह भी सामने आया है कि 10 नवंबर को लाल किले के बाहर धमाके में इस्तेमाल की गई विस्फोटकों से लदी कार चलाने वाला डॉ. उमर-उन-नबी वर्ष 2016 और 2018 में आतंकी संगठनों में शामिल होने की कोशिश कर चुका था. लेकिन वह अपने प्रयासों में सफल नहीं हो पाया था.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने खोला राज

अधिकारियों ने अब तक जुटाए गए सबूतों को एक साथ जोड़ते हुए बताया है कि आरोपी चिकित्सक मुजम्मिल ग़नी, मारे जा चुके उमर-उन नबी और अदील राठेर, फिलहाल फरार उसका भाई मुज़फ्फर राथर, मौलवी इरफान, कारी आमिर और तुफैल गाज़ी अप्रैल 2022 में श्रीनगर में स्थित ईदगाह में मिले थे.अधिकारियों ने बताया कि बैठक के दौरान उन्होंने “अंसार इंटेरिम” नामक एक आतंकी संगठन बनाने का फैसला किया. अदील को समूह का ‘अमीर’ (प्रमुख), मौलवी इरफान को ‘उप-अमीर’ और गनी को कोषाध्यक्ष नामित किया गया.

आतंकवादी समूहों में “अंसार” को आमतौर पर विश्व स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा से जोड़ा जाता है. अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए चिकित्सकों और उपदेशकों ने पूछताछ करने वालों को बताया कि सक्रिय आतंकवादियों से उनके सभी संपर्क टूट जाने के कारण एक नया समूह बनाने की आवश्यकता उत्पन्न हुई. बैठक के दौरान सदस्यों को भूमिकाएं और ‘कोड’ सौंपे गए थे. उमर ने समन्वयक की भूमिका संभाली और गनी के साथ मिलकर वित्त व खरीद का काम संभाला.

साल 2023 में इस ग्रुप ने हरियाणा के सोहना और नूंह क्षेत्रों से उर्वरक खरीदने का निर्णय लिया. उमर के निर्देश पर, फरीदाबाद की रसायन की एक दुकान से एनपीके (जिसे इस संदर्भ में आमतौर पर पोटेशियम नाइट्रेट के नाम से जाना जाता है) भी खरीदा गया. पूछताछ के दौरान, गिरफ्तार चिकित्सकों ने बताया कि उमर ने साधारण आईईडी का निर्माण सीखने के लिए ऑनलाइन वीडियो देखने शुरू किए थे और वह ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (टीएटीपी) तैयार करने में कामयाब रहा था जो सबसे प्रमुख पेरोक्साइड विस्फोटकों में से एक है.

अधिकारियों के अनुसार, अदील ने नए आतंकी समूह के लिए सदस्यों की तलाश शुरू कर दी थी और दक्षिण कश्मीर के दानिश उर्फ ​​जसीर नामक एक व्यक्ति को अपने समूह में शामिल कर लिया था. अदील दानिश को फरीदाबाद में अल-फलाह विश्वविद्यालय में किराए के एक आवास में ले गया जहां दोनों ने उमर और गनी को टीएटीपी विस्फोटक सामग्री तैयार करते हुए देखा.

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बाद में उमर ने दानिश को ‘फिदायीन’ (आत्मघाती) हमला करने के लिए मनाने की कोशिश की लेकिन दानिश ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और इस विश्वास का हवाला देते हुए अंतिम क्षण में अपना इरादा बदल दिया कि इस्लाम में आत्महत्या हराम है.

डॉक्टर उमर ही था मास्टरमाइंड

पुलवामा के 28 वर्षीय चिकित्सक उमर को कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले इस नेटवर्क का सबसे कट्टरपंथी सदस्य और प्रमुख संचालक माना जा रहा है. सबूतों से पता चलता है कि उसकी मूल योजना राष्ट्रीय राजधानी या किसी धार्मिक महत्व के स्थल पर भीड़भाड़ वाली जगह पर एक वीबीआईईडी (व्यापक रूप से घातक विस्फोट करने वाला बम) रखने और फिर भाग जाने की थी.

हालांकि, यह साजिश उस समय विफल हो गई जब श्रीनगर पुलिस की गहन जांच के चलते गनी की गिरफ्तारी हुई और विस्फोटक बरामद किए गए. इससे उमर संभवतः घबरा गया और अंततः लाल किले के बाहर समय से पहले विस्फोट कर दिया. 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके बुनपोरा, नौगाम में दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के पोस्टर दिखाई देने की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण घटना के बाद इस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ था.

श्रीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की पड़ताल की जिसके आधार पर तीन स्थानीय निवासियों आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद को गिरफ्तार किया गया. इन सभी के खिलाफ पहले पथराव के मामले दर्ज थे. उनसे पूछताछ के बाद चिकित्सा कर्मी से मौलवी बने शोपियां के निवासी मौलवी इरफान अहमद को गिरफ्तार किया गया, जिस पर पोस्टर उपलब्ध कराने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने का आरोप है.

(इनपुट-एजेंसी)

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