नई दिल्ली. दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को अपना धरना खत्म कर दिया. वह 9 दिन से धरने पर थे. वह एलजी निवास से बाहर निकल गए हैं. सीएम के धरना समाप्त करने की घोषणा के बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा, अधिकारियों ने मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया. बेहतर तालमेल के साथ काम करेंगे. बता दें कि इससे पहले दिल्ली के उपराज्यपाल ने अरविंद केजरीवाल को एक चिट्ठ लिख कर उनसे अधिकारियों से तत्काल मिलकर बातचीत के जरिये दोनों पक्षों की चिंताओं पर गौर करने को कहा था.

वहीं, उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों द्वारा उपराज्यपाल कार्यालय के भीतर दिये जा रहे धरने को ‘ असंवैधानिक ’ घोषित करने का निर्देश दिए जाने के लिये दायर याचिका पर शीघ्र सुनवाई से इनकार कर दिया. केजरीवाल और उनके मंत्री अपनी मांगों के समर्थन में 11 जून की शाम से उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय में धरना दे रहे थे. इनकी मांगों में आईएएस अधिकारियों को अपनी हड़ताल खत्म करने का निर्देश देने और काम रोकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी शामिल है.

संवैधानिक संकट का दिया था हवाला
न्यायमूर्ति एस एस नजीर और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की अवकाश कालीन पीठ ने कहा कि ग्रीष्मावकाश के बाद यह याचिका सूचीबद्ध की जाएगी. याचिकाकर्ता हरि नाथ राम के वकील शशांक सुधि ने इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि उपराज्यपाल के कार्यालय के भीतर मुख्यमंत्री के ‘असंवैधानिक और गैरकानूनी’ धरने के कारण संवैधानिक संकट पैदा हो गया है.

22 जून के लिए सूचीबद्ध
सुधि ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने कल इस मामले में सुनवाई की थी और अब यह प्रकरण 22 जून के लिये सूचीबद्ध है. उन्होंने कहा कि गंभीर जल संकट की वजह से राजधानी ‘‘ आपात स्थिति ’ का सामना कर रही है. इस पर पीठ ने शीघ्र सुनवाई से इंकार करते हुए कहा, ‘‘हम न्यायालय के अवकाश के बाद इसे सूचीबद्ध करेंगे.’’ याचिका में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और आप सरकार को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.