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नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से उनके खिलाफ दायर किए गए मानहानि के एक मामले में निचली अदालत के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली। अदालत ने उन्हें हिरासत में लेने का आदेश दिया था। केजरीवाल की ओर से वकील ने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की खंडपीठ के समक्ष कहा, “मैं यह मामला वापस लेना चाहता हूं।” यह भी पढ़े:मोदी सरकार में आर्थिक दृष्टि का अभाव : चिदंबरम Also Read - नई दिल्ली में मंदिर हटाने पर मचा हंगामा, केजरीवाल सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे लोग

आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान भारत के कथित ‘सबसे भ्रष्ट नेताओं’ में गडकरी का भी नाम लिया था, जिसके बाद गडकरी ने केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का आपराधिक मामला दायर किया था। पिछले साल मई में एक निचली अदालत ने जमानत बांड न भरने के कारण केजरीवाल को न्यायिक हिरासत में लेने का आदेश दिया था। केजरीवाल ने यह कहते हुए जमानत बांड भरने से इंकार कर दिया था कि यह जरूरी नहीं है और उन्हें इसकी बजाय लिखित आश्वासन देने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने इस मामले में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हालांकि उच्च न्यायालय के परामर्श पर उन्होंने निचली अदालत से जमानत का अनुरोध किया।

पीठ ने इससे पहले एक सुनवाई के दौरान कहा था कि मामले में अब उच्च न्यायालय के विचार करने के लिए कुछ नहीं रह गया है, क्योंकि केजरीवाल जमानत का बांड भर चुके हैं। पीठ ने आप के वकील से पूछा कि क्या मुख्यमंत्री अब भी मामला जारी रखना चाहते हैं? इसके जवाब में केजरीवाल के वकील ने कहा था कि उन्होंने अभी इस पर फैसला नहीं किया है। उच्च न्यायालय में दी गई याचिका में केजरीवाल ने पूछा था कि मानहानि जैसे आपराधिक मामलों में जिन लोगों के खिलाफ अदलतों से सम्मन जारी किया जाता है, उनसे जमानती बांड या जमानत की मांग क्या उचित है?