नई दिल्ली: मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट के आरोप के बाद दिल्ली सरकार ने अब किसी भी विवाद से आगे बचने के लिए यह कदम उठाने का फैसला किया है. दिल्ली सरकार ने यह ऐलान किया है कि अब हर बैठक की न सिर्फ रिकॉर्डिंग होगी, बल्कि उसका सरकारी वेबसाइट पर प्रसारण भी किया जाएगा. यही नहीं केजरीवाल सरकार की कैबिनेट मीटिंग का भी दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर लाइव प्रसारण हो ऐसी भी तैयारी चल रही है. Also Read - दिल्ली: कोरोना संक्रमित 1 लाख पार, मृतकों की संख्या 3 हज़ार से ऊपर, केजरीवाल बोले- फ़िक्र न करें लोग

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इसके साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए सरकार की नीतियों से जुड़े फाइलों पर कब किस मंत्री और अधिकारी ने क्या लिखा और कितना समय लगाया इसका ब्यौरा भी वेबसाइट पर जनता के लिए डाला जाएगा. क्योंकि केजरीवाल सरकार लगातार ये आरोप लगाती रही है कि अधिकारी फाइलों पर लंबे समय तक बैठे रहते हैं और योजना या आदेश में देरी करते हैं. यह भी पढ़ें- दिल्ली: चीफ सेक्रेटरी से मारपीट मामले में नया मोड़, CM के सलाहकार वीके जैन गिरफ्तार Also Read - Delhi Covid-19 Latest Situation: कोविड-19 के बढ़ते मामलों के चलते दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, अब इन लोगों के लिए आवश्यक होगी रैपिड एंटीजन जांच

सूत्रों की मानें तो केजरीवाल सरकार अगले 1-2 दिन में इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दे सकती है और प्रस्ताव पास होने मार्च में दिल्ली विधानसभा में पेश होने वाले दिल्ली सरकार के बजट इसके लिए प्रावधान किया जा सकता है. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने इस फैसले पर दिल्ली सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली.

बता दें कि दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ कथित थप्पडकांड़ को लेकर दिल्ली सरकार की काफी फजीहत हुई थी. जिसके बाद मुख्य सचिव से मारपीट के आरोप में दिल्ली सरकार के दो विधायक अमानतुल्ला खान और प्रकाश जरवाल 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं. दोनों विधायकों ने तीस हजारी कोर्ट में जमानत अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने ठुकरा दिया था. कोर्ट के आदेश के बाद दोनों विधायकों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है.

आपको बता दें कि मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया है कि सीएम केजरीवाल के घर आधी रात को हुई बैठक में उनके AAP विधायकों ने उनके साथ मारपीट की जबकि AAP और दिल्ली सरकार का दावा है कि अधिकारी महीनों से फाइलों पर बैठे रहते हैं और जब उन फाइलों को क्लियर करवाने के लिए मुख्य सचिव को बुलाया गया तो उन्होंने विधायकों से अभद्र व्यवहार किया.