नई दिल्ली: प्रशासनिक शक्तियों पर केंद्र के साथ लंबे समय से संघर्ष कर रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार शाम केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की तथा नौकरशाहों के तबादले और नियुक्तियों संबंधी फैसलों पर अपनी सरकार के दावों से अवगत कराया. गृह मंत्री से उन्हीं के सरकार की शिकायत करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और एलजी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या कर रहे हैं. मुलाकात के बाद केजरीवाल ने कहा कि भाजपा नेता उनके विचारों से ‘‘संतुष्ट दिखे.’’

ट्रांसफर-पोस्टिंग पर पेश किया दावा
उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया के साथ केजरीवाल ने गृह मंत्री के घर जा कर उनसे मुलाकात की. केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अब उनकी सरकार के पास सेवाओं के मामले में पूरी शक्ति है और केंद्र सरकार तथा उप राज्यपाल को इन आदेशों का पालन पूरी तरह करना चाहिए. मुलाकात के बाद केजरीवाल ने कहा कि सिंह के ‘‘हाव भाव’’ से यह दिखा कि वह उनके विचारों से सहमत दिखे और केंद्रीय मंत्री अपने अधिकारियों के साथ इस मामले में चर्चा करेंगे. गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने हालांकि, बाद में बताया कि सिंह ने मुख्यमंत्री से कहा कि उनका मंत्रालय इस मामले में कानूनी सलाह लेगा.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या का आरोप
मुलाकात के बाद संवाददाओं से बातचीत करते हुए केजरीवाल ने बताया, ‘‘हमने उनसे कहा कि केंद्र और उप राज्यपाल उच्चतम न्यायालय के आदेशों की विचित्र तरीके से व्याख्या कर रहे हैं. वे कह रहे हैं कि वे आधा फैसला मानेंगे लेकिन बाकी आधा नहीं मानेंगे.’’ शीर्ष अदालत ने दिल्ली में शासन के मोटे तौर पर मापदंड तय किये थे. उसने उपराज्यपाल का क्षेत्राधिकार जमीन, पुलिस और कानून व्यवस्था तक सीमित कर दिया था. आप सरकार का दावा है कि इस फैसले के हिसाब से दिल्ली सरकार के अधिकारियों के तबादले एवं तैनाती समेत सेवा विषयक मामलों पर उसका नियंत्रण है.

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फैसले के बाद भी जारी है तनातनी
चार जुलाई को शीर्ष अदालत के फैसले के कुछ ही घंटे बाद दिल्ली सरकार ने नौकरशाहों के तबादले एवं तैनाती की नयी व्यवस्था शुरू की थी जिसमें मुख्यमंत्री को मंजूरी प्रदान करने वाला प्राधिकार बनाया गया था. लेकिन सेवा विभाग ने यह कहते हुए इसे मानने से इनकार कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2015 की वह अधिसूचना खारिज नहीं की है जो गृहमंत्री को तबादले एवं तैनाती का प्राधिकार बनाती है.

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दावा किया संतुष्ट दिखे गृहमंत्री
केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री से कहा कि केंद्र को या तो सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के पूरे फैसले का पालन करना चाहिए अथवा इसे खंडपीठ का फैसला आने तक रुकना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘आप कैसे कह सकते हैं कि आप संवैधानिक पीठ के आधे फैसले और खंड पीठ के आधे फैसले का पालन करेंगे.’’ मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने फैसले का प्रत्येक पैरा पढ़ कर गृह मंत्री को सुनाया और उन्होंने जो उनसे (गृह मंत्री से) कहा, वह इससे संतुष्ट दिखे.

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इससे पहले केजरीवाल ने कहा था कि यह बड़ा खतरनाक है कि केंद्र सरकार उप राज्यपाल को शीर्ष अदालत के आदेश का पालन नहीं करने की सलाह दे रही है. गृह मंत्रालय एक बयान जारी कर आरोपों से इनकार कर चुका है. केंद्र और उपराज्यपाल कह चुके हैं कि यथास्थिति बनाए रखने की जरूरत है क्योंकि सेवा पर नियंत्रण संबंधी मामला उच्चतम न्यायालय की नियमित पीठ के सामने लंबित है.