नई दिल्ली: दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. एक आदेश जारी कर दिल्ली के सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि कोई भी मरीज जिसे COVID19 लक्षण हैं और जो मध्यम या गंभीर श्रेणी में हैं, उसे इस बहाने अस्पताल नें प्रवेश से वंचित न किया जाए कि मरीज के पास COVID-19 पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यहां के अस्पतालों को शनिवार को चेतावनी दी कि कोविड-19 मरीजों को ‘‘भर्ती करने से मना करने’’ और बिस्तरों की कालाबाजारी करने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं, शहर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ने के मद्देनजर दिल्ली सरकार द्वारा गठित एक समिति ने सुझाव दिया कि दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग सिर्फ इसके निवासियों के इलाज के लिये किया जाना चाहिए. Also Read - Coronavirus In Delhi: दिल्ली में करीब 90 हजार लोग हुए स्वस्थ, 3371 लोगों की मौत

सरकारी आदेश के बाद दिल्ली के प्राइवेट अस्पताल अब कोरोना के मरीजों का इलाज करने से इनकार नहीं कर सकते. अब सभी प्राइवेट अस्पतालों में बेड की ब्लैक मार्केटिंग पर नजर रखने के लिए सरकार के प्रतिनिधि रिसेप्शन पर बैठेंगे और मरीजों को बेड दिलाना सुनिश्चित करेंगे. दिल्ली सरकार ने कहा है कि अस्पतालों की कोरोना पर ‘ब्लैक मार्केटिंग’ नहीं चलने देंगे. Also Read - केजरीवाल ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कहा- केंद्रीय विश्वविद्यालयों के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं करें रद्द 

दिल्ली में शनिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1,320 नये मामले सामने आने के साथ कुल मामले बढ़ कर 27,500 से अधिक हो गये, जबकि इस महामारी से अब तक कुल 761 लोगों की मौत हुई है. यहां 16,229 इलाजरत मामले हैं. इससे पहले दिल्ली सरकार ने सर गंगाराम अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई. दिल्ली सरकार ने महामारी रोग अधिनियम के उल्लंघन के लिए सर गंगाराम अस्पताल पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. गंगाराम अस्पताल पर कोरोना वायरस की टेस्टिंग नियमों के उल्लंघन के चलते एफआईआर दर्ज करवाई गई है.

दिल्ली सरकार द्वारा शनिवार शाम जारी आदेश इसमें कहा गया है कि किसी कोरोना हॉस्पिटल में अगर कोई कोरोना संदिग्ध एडमिट है तो उसको अलग वार्ड में रखा जाए और कोरोना मरीजों लिए जो आइसोलेशन बेड्स निर्धारित हैं उनको कोरोना संदिग्धों को ना दिया जाए. आदेश में लिखा है कि ये संज्ञान में आया है कि बहुत से बिना लक्षण वाले और हल्के लक्षण वाले मामले भी अस्पताल में एडमिट किए गए गए हैं.