नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में सेवा दे चुकीं पूर्व राजदूत माधुरी गुप्ता को जासूसी के जुर्म में शनिवार को तीन वर्ष जेल की सजा सुनाई है. अदालत ने माधुरी गुप्ता को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को संवेदनशील सूचनाएं देने के जुर्म में दोषी करार देते हुए कहा कि उनके इस काम से देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ. Also Read - पाकिस्‍तान ने जम्मू-कश्मीर में ड्रोन से गिराए हथियार, लश्‍कर के तीन आतंकी गिरफ्तार

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने पूर्व राजदूत को जासूसी के अपराध और कानून के तहत संरक्षित सूचना को गलत तरीके से भेजने के लिए अधिकतम सजा सुनाई और टिप्पणी की कि उनकी तरह शिक्षित महिला के साथ नरमी नहीं बरती जा सकती. Also Read - केरल, पश्चिम बंगाल से अरेस्‍ट अलकायदा आतंकियों का ये था प्‍लान, पाक हैंडलर से मिल रहे थे आदेश

61 वर्षीय माधुरी उच्चायोग में 2007 से 22 अप्रैल 2010 को गिरफ्तार होने तक (प्रेस एवं सूचना) में उप सचिव थीं. उन्हें शुक्रवार को सरकारी गोपनीयता (ओएस) अधिनियम के विभिन्न प्रावाधानों के तहत दोषी ठहराया गया था. Also Read - 7 साल के निलंबन के बाद नेपाल में शुरू होंगी ट्रेनेें, यह पहली ब्रॉड-गेज यात्री रेलवे सर्विस होगी

सजा सुनाने के बाद अदालत ने माधुरी को जमानत देते हुए उसे दोषी ठहराने और सजा के खिलाफ अपील करने के लिए जमानत दे दी. भारतीय खुफिया एजेंसियों को संदेह था कि वह 2008 से पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस के लिए जासूसी करती थी.

अभियोजन ने कहा था कि उसने आईएसआई के जासूसों को अक्तूबर 2009 से अप्रैल 2010 तक अपने ई-मेल अकाउंट से सूचनाएं भेजीं. अदालत ने कहा, ‘‘नि:संदेह उनके जैसे व्यक्तित्व से उम्मीद की जाती है कि वह सामान्य नागरिक की तुलना में ज्यादा जवाबदेही के साथ काम करेगी क्योंकि वह उच्च पद पर आसीन है लेकिन उसके कृत्य से देश की छवि खराब हुई और देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ.’’

अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए वह सजा में नरमी पाने की हकदार नहीं हैं.’’ उसे दोषी ठहराते हुए अदालत ने कहा था कि आरोपी द्वारा ई-मेल से साझा की गई सूचनाएं काफी संवेदनशील थीं जो दुश्मन देश के लिए उपयोगी हो सकती थीं और इसकी गोपनीयता का काफी महत्व था.

माधुरी को सरकारी गोपनीयता कानून की धारा तीन और पांच के तहत दोषी ठहराया गया जिसमें अधिकतम तीन वर्ष की कैद और जुर्माना या दोनों हो सकता है. उन्होंने इस आधार पर अदालत से नरमी बरतने की अपील की थी कि वह वरिष्ठ नागरिक है, अकेली महिला है और परिस्थितियों की शिकार है.

लोक अभियोजक इरफान अहमद ने उसके हलफनामे का विरोध करते हुए कहा कि वह शिक्षित महिला है और महत्वपूर्ण पद पर रही है और उसके जैसे व्यक्ति से इस तरह की गतिविधियों में संलिप्तता की उम्मीद नहीं की जा सकती.

पाकिस्तानी अधिकारियों को कथित रूप से संवेदनशील सूचना देने और आईएसआई के दो अधिकारियों मुबशर रजा राणा एवं जमशेद के संपर्क में रहने के आरोप में उसे 22 अप्रैल 2010 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था.

(इनपुट: एजेंसी)