नई दिल्ली: उर्दू कहानी कहने की कला दास्तानगोई को फिर से जीवन देने में जुटे युवा दास्तानगो अंकित चड्ढा की 30 वर्ष की उम्र में मौत हो गई. दिल्ली के लोधी रोड स्थित शवदाह गृह में शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. करीबी पारिवारिक संबंधी ने से कहा, वह पुणे अपनी एक प्रस्तुति देने गया था, जहां पास में ही एक झील में घूमने के दौरान उसका पैर फिसल गया. झील में डूबने से उसकी मौत हो गई. उन्होंने कहा कि घटना परसों की है और डूबने के कई घंटे बाद उसके शव को बाहर निकाला जा सका. Also Read - दिल्ली-मुंबई नहीं देश के इस शहर का हाल सबसे बुरा, कोरोना पॉजिटिव केस के मामले में सबसे आगे

अंकित पिछले कई सालों से दास्तानगोई कर रहे थे. मुख्य तौर पर वह कबीर की वाणी को उर्दू की दास्तान में पिरोकर सुनाने के लिए जाने जाते थे. वह जश्न ए रेख्ता, कबीर उत्सव जैसे महत्वपूर्ण मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के साथ साथ देश विदेश में भी प्रस्तुति दे चुके थे.अंकित ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज से हिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया था. इसके बाद उन्होंने महमूद फारूकी का वर्कशॉप ज्वाइन किया. एक मई को अंकित ने ट्वीट किया था. अब हम अमर भये न मरेंगे. Also Read - महाराष्ट्र: सोमवार को पुणे और सतारा में होगी भारी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट

महमूद फारूकी पिछले कई सालों से दास्तानगोई की कला को पुनर्जीवित करने की कोशिश में लगे हैं. वह देश के प्रमुख शहरों के अलावा विदेश में भी दास्तानगोई के कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहे हैं. फारूकी का कहना है कि वह टैलेंटेड और शानदार लड़का था. उसने दास्तानगोई को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया. मैंने उसे 6 साल तक ट्रेंड किया था. उसका इस तरह जाना हमारे लिए बहुत बड़ा नुकसान है.