
Farha Fatima
फ़रहा फ़ातिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन के बाद पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2015 में LIVE India में इंटर्नशिप से की. प्रारंभिक दौर में ही उन्होंने जामिया ... और पढ़ें
दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है. लंबे समय से इंतजार करा रहा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब अपने अंतिम चरण में है और फरवरी 2026 में पूरी तरह खुल सकता है. वर्तमान में दिल्ली से देहरादून की दूरी करीब 235-250 किलोमीटर है, जिसे तय करने में 5-6 घंटे लगते हैं. इस नए 210 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे के चालू होने पर यह दूरी घटकर 210 किमी हो जाएगी और यात्रा समय मात्र ढाई घंटे रह जाएगा. यह परियोजना न केवल समय बचाएगी बल्कि उत्तराखंड पर्यटन, व्यापार और आर्थिक विकास को भी बड़ा बढ़ावा देगी.
यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा भारतमाला परियोजना के तहत बनाई जा रही है. इसकी कुल लागत लगभग 11,869 से 13,000 करोड़ रुपये है. एक्सप्रेसवे 6-12 लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे है, जहां अधिकतम गति 100 किमी प्रति घंटा होगी. यह चार चरणों में विभाजित है.
पहला चरण: दिल्ली के अक्षरधाम से बागपत (खेकरा) तक, करीब 32 किमी. यह हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका है और दिसंबर 2025 से ट्रायल रन शुरू हो गया है.
दूसरा चरण: बागपत से सहारनपुर तक.
तीसरा चरण: सहारनपुर बाईपास का चौड़ीकरण.
चौथा चरण: सहारनपुर से देहरादून तक, जिसमें सुरक्षा और फिनिशिंग कार्य चल रहे हैं.
एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन है. राजाजी नेशनल पार्क से गुजरते हुए 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, जो एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव कॉरिडोर है. यहां 6 एनिमल अंडरपास हैं, ताकि हाथी, बाघ जैसे वन्यजीव सुरक्षित आवागमन कर सकें. कुल 100 से अधिक अंडरपास, 5 रेलवे ओवरब्रिज और बारिश के पानी के संचयन की व्यवस्था है. निर्माण में करीब 18,000 पेड़ काटे गए, लेकिन इसके बदले 50,000 से अधिक नए पेड़ लगाए जा रहे हैं.
दिसंबर 2025 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में बताया कि कार्य उन्नत चरण में है और जनवरी 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि कुछ स्रोत फरवरी का जिक्र कर रहे हैं.
एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और हरिद्वार-ऋषिकेश रोड से जुड़ेगा. इससे उत्तर प्रदेश के बागपत, बारौत, शामली, सहारनपुर जैसे जिलों का विकास होगा. उत्तराखंड में मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार जैसे पर्यटन स्थलों की पहुंच आसान हो जाएगी. ट्रैफिक जाम कम होगा और ईंधन की बचत होगी.
कुल मिलाकर, यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा. जनवरी-फरवरी 2026 में इसका पूरा उद्घाटन होने की प्रबल संभावना है, जो लाखों यात्रियों के लिए वरदान साबित होगा. अब सभी को जल्द ही इसके खुलने का इंतजार है.
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