नई दिल्ली. पुरानी कहावत है कि पैशन और हार्डवर्क से कामयाबी कदम चूमती है. जामिया मिलिया इस्लामिया के इलेक्ट्रिशियन के बेटे ने इसे साबित कर दिया है. आमिर अली को एक अमेरिकी कंपनी ने 1 लाख अमेरिकी डॉलर (70 लाख रुपये) का पैकेज दिया है. यह जामिया के किसी डिप्लोमा होल्डर को ऑफर की गई अधिकतम सैलरी पैकेज है.

7 भाई-बहनों में दूसरे नंबर के अली ने जामिया स्कूल बोर्ड एग्जाम में बढ़िया परफॉर्मेंस किया था. हालांकि, इसके बाद भी वह जामिया के बीटेक कोर्स में एडमिशन नहीं पा पाया था. इसके लिए उसने तीन बार प्रयास भी किया. इस बीच वह आर्किटेक्चर कोर्स के लिए NIT झारखंड में सिलेक्ट भी हो गया था, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह वहां एडमिशन नहीं ले पाया.

2015 में मिला एडमिशन
साल 2015 में उसने जामिया में मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में एडमिशन लिया. इसके बाद इलेक्ट्रिक गाड़ियों के उसके शौक ने एक नई ऊंचाई देनी शुरू कर दी. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए अली ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर का चार्ज ज्यादा है. इसे देखते हुए उसने एक थ्योरी डेवलप की है. ये सफल हो गया तो चार्ज करने वाली गाड़ियों पर आने वाला खर्च लगभग शून्य हो जाएगा.

शुरुआत में टीचर नहीं करते थे भरोसा
अली के मुताबिक, शुरुआत में मेरे टीचर्स मुझपर विश्वास नहीं जता रहे थे. इसके बाद असिस्टेंट प्रोफेसर वकार आलम ने मेरे काम को पहचाना और गाइड किया. इसके बाद रिसर्च का एक प्रोटोटाइप तैयार किया और जामिया के तालिमी मेला में इसे दिखाया. इसके बाद सीआई ने इसे प्रमोट किया और अंत में यह यूनिवर्सिटी के वेबसाइट पर भी आया.

अमेरिका में काम का मिला ऑफर
अली के मुताबिक, उसके इस आइडियो को उत्तरी करोलिना के चारलोट के फ्रिसन मोटर वर्क ने तवज्जो दिया और उससे यूनिवर्सिटी के जरिए कॉन्टेक्ट किया. इसके बाद उन्होंने उसे अमेरिका में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम इंजीनियर के तौर पर काम करने का ऑफर दिया. अली के पिता शमशाद अली के मुताबिक, अली बचपन से इलेक्ट्रिशिटी और दूसरे इलेक्ट्रिकल इक्यूपमेंट की तरफ आकर्षित था. वह उनसे तरह-तरह के सवाल पूछता था. उसके सवाल ऐसे होते थे कि उनका जवाब मेरे पास नहीं होता था.