नई दिल्ली: पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि यहां रोहिणी स्थित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में ब्रेन फिंगरप्रिंटिंग मशीन इस साल जून में काम करने लगेगी. ब्रेन फिंगरप्रिंटिंग एक प्रकार की, झूठ पकड़ने की तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति के मस्तिष्क की तरंगों को मापकर पता लगाया जाता है कि वह शख्स उससे पूछे गए सवालों का सही जवाब दे रहा है या नहीं. Also Read - Corona Guidelines for Navratri and Ramadan 2021: यूपी, बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक, जानिए इन 6 राज्यों में नवरात्र और रमजान को लेकर क्या हैं नियम?

हाईकोर्ट ने मार्च में रोहिणी स्थित एफएसएल में यह प्रणाली लगाने का निर्देश दिया था. चार साल के एक बच्चे के लापता होने से संबंधित याचिका पर सुनवाई में यह निर्देश दिया गया. Also Read - क्‍या दिल्‍ली में लगेगा लॉकडाउन? CM केजरीवाल ने कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच आज 12 बजे बुलाई मीटिंग

अदालत को सूचित किया गया था कि प्रयोगशाला में नार्को परीक्षण के लिए कोई सुविधा नहीं थी. अदालत को 20 मई को सूचित किया गया कि मशीन लगा दी गई है और यह 31 मई के बाद काम करने लगेगी. तब तक विद्युतीकरण का काम पूरा हो जाएगा. Also Read - UP: युवती ने 2 साल पहले जिस 'अशोक राजपूत' से की थी शादी, वह निकला अफजल खान

अदालत ने बच्चे के लापता होने के मामले में मुख्य संदिग्ध करीब 11 साल के बच्चे की मां और बहन से पूछताछ के लिए इस प्रणाली के लिए कहा था. आरोपी बालक को सीसीटीवी फुटेज में लापता बच्चे के साथ आखिरी बार देखा गया था.