नई दिल्ली. दिल्ली में विधानसभा चुनाव की तैयारियां औपचारिक रूप से भले न शुरू हुई हों, लेकिन इसके संकेत मिलने शुरू हो गए हैं. चुनावों से पहले अरविंद केजरीवाल सरकार का ‘भाषा दांव’ इस कड़ी में पहला कदम माना जा सकता है. दिल्ली सरकार ने मैथिली और भोजपुरी को बढ़ावा देने के लिए सोमवार को कई कदमों की घोषणा की. इसमें आठवीं कक्षा से 12वीं तक मैथिली को वैकल्पिक विषय के तौर पर पढ़ाने और आईएएस की तैयारी करने वाले ऐसे छात्रों को मुफ्त कोचिंग का प्रबंध करना शामिल है जिन्होंने वैकल्पिक विषय के तौर पर इसे चुना हो. विधानसभा चुनावों से पहले दिल्ली सरकार का यह कदम विपक्षी दलों के लिए भारी पड़ने वाला माना जा रहा है. क्योंकि दिल्ली में बड़ी संख्या में बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग रहते हैं, जिनकी भाषा मैथिली या भोजपुरी है.

सियासी जानकारों के अनुसार यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में विधानसभा चुनावों में कुछ ही वक्त रह गया है और जो लोग ये भाषाएं बोलते हैं वह शहर के किसी भी चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल कि किस्मत का फैसला करने में अहम भूमिका रखते हैं. उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने संवाददाताओं से कहा, “मैथिली दिल्ली के स्कूलों में आठवीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक वैकल्पिक विषय के तौर पर पढ़ाई जाएगी. दिल्ली के छात्र अब उर्दू और पंजाबी की तरह मैथिली को वैकल्पिक विषय के तौर पर सीख पाएंगे.”

सरकार के मुताबिक दिल्ली में करीब 60 से 70 लाख मैथिली एवं भोजपुरी भाषी लोग हैं. सिसोदिया ने कहा कि आप सरकार केंद्र सरकार से भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का भी अनुरोध करेगी. दिल्ली सरकार के इस फैसले के सियासी मतलब निकाले जाने लगे हैं. राजनीति के जानकार बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन देखने के बाद केजरीवाल सरकार का यह फैसला आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को लाभ पहुंचा सकता है.

(इनपुट – एजेंसी)