नई दिल्ली: दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली सरकार ने विधायकों को अपने क्षेत्र के विकास के लिए मिलने वाली राशि को सालाना चार करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया. बता दें कि दिल्ली में एक विधायक को अपने निर्वाचन क्षेत्र में विभिन्न कार्य कराने के लिए एक साल में चार करोड़ रुपए मिलते हैं. Also Read - दिल्ली: कोरोना मुक्त हुए डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, अस्पताल से छुट्टी मिली

दिल्ली विधानसभा को कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय के बारे में सूचित करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सभी विधायक मांग कर रहे थे कि विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि की राशि को बढ़ाया जाए. सिसोदिया ने विधानसभा को बताया, ”कैबिनेट ने विधायक निधि को मौजूदा चार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए करने का निर्णय किया है.”
डिप्टी सीएम ने कहा कि निधि और कामकाज को विकेंद्रित करने की यह अच्छी मिसाल है. दिल्ली सरकार देश में अपनी तरह की पहली सरकार है जो विभिन्न दलों के विधायकों के जरिए स्थानीय विकास को सुनिश्चित करना चाहती है. सिसोदिया ने कहा, ”विधायक निधि का इस्तेमाल विधायकों के विवेक पर होता है और इसका इस्तेमाल किसी भी उद्देश्य या स्थानीय परियोजना के लिए किया जा सकता है.”

विधायकों को निधि खर्च करने में आने वाली दिक्क्तों के बारे में पूछने पर सिसोदिया ने कहा कि कैबिनेट ने शहरी विकास मंत्री को विधायक निधि से संबंधित दिशानिर्देशों में मामूली बदलाव करने का अधिकार दिया है. सिसोदिया ने यह भी बताया कि कैबिनेट ने राष्ट्रीय राजधानी में कई भारतीय भाषाओं जैसे तेलुगु, कश्मीरी, मलयालम, गुजराती समेत अन्य भाषाओं की अकादमी के अलावा विदेशी भाषा अकादमी स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है.दिल्ली के शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि कैबिनेट का फैसला इसी साल से लागू किया जाएगा.