नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे पुलिस आयुक्त को भाजपा के तीन नेताओं द्वारा कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण देने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने की सलाह दें. दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली की हिंसा मामले में कहा, हम इस देश में एक और 1984 नहीं होने दे सकते. Also Read - दीप सिद्धू पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित, अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी

जस्‍ट‍िस एस. मुरलीधर और जस्‍ट‍िस तलवंत सिंह की पीठ संशोधित नागरिकता कानून को लेकर उत्तरपूर्वी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में शामिल लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. Also Read - Missing Farmers Helpline Number: ट्रैक्टर रैली में गायब किसानों की मदद के लिए जारी किया गया हेल्पलाइन नंबर

कोर्ट ने कहा कि सीएम और डिप्टी सीएम को लोगों के बीच विश्वास निर्माण के लिए प्रभावित क्षेत्रों का भी दौरा करना चाहिए. यह समय है बाहर तक पहुंचने का है. Also Read - Farmers Protest: दिल्ली पुलिस अलर्ट, जारी की एडवायजरी, अब नहीं चलेगा दंगा-फसाद

हाईकोर्ट ने कहा कि बाहर के हालात बहुत ही खराब हैं. हाईकोर्ट ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता, डीसीपी (अपराध) से कहा कि क्या उन्होंने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण का वीडियो क्लिप देखा है, उस क्लिप को अदालत कक्ष में चलाया गया.

वकील फजल अब्दाली और नबीला हसन के जरिए दाखिल याचिका में कहा गया है कि 22 फरवरी को करीब 500 लोग जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पहुंचे, जहां पर महिलाएं सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थीं.

इसमें आरोप लगाया गया कि 23 फरवरी को भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने मौजपुर मेट्रो स्टेशन के पास सीएए के समर्थन में रैली निकाली और भड़काऊ, आपत्तिजनक बयान दिए और इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक ट्वीट भी पोस्ट किया .

याचिका में मिश्रा, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा तथा अन्य के खिलाफ अधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है. संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में हुई हिंसा में 21 लोगों की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.