नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से लाभ के पद पर होने की वजह से अयोग्य ठहराए गए आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की अर्जी पर दोबारा सुनवाई करने को कहा है. इस तरह इन अयोग्य ठहराए गए विधायकों को फिलहाल राहत मिल गई है और उनकी सदस्यता बहाल हो गई है. फिलहाल दिल्ली की 20 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का खतरा टल गया है. फैसले से खुश दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह सत्य की जीत है. दिल्ली की जनता को न्याय मिला है. Also Read - Delhi Coronavirus Update: लॉकडाउन में ढील के बाद बढ़े केस, सीएम बोले, चिंता की बात नहीं, मामले 13 हजार के पार

चुनाव आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने इन विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी थी. इन विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया गया था. आप के इन अयोग्य विधायकों ने हाईकोर्ट में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी थी. Also Read - MCD नेताओं का आरोप: कोविड-19 से होने वाली मौतों की कम संख्या बता रही दिल्ली सरकार

अदालत ने कहा कि आयोग मामले की दोबारा सुनवाई कर राष्ट्रपति को सिफारिश भेजे. कोर्ट ने इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने वाली अधिसूचना को रद्द कर दिया है. अदालत में इन आप विधायकों ने कहा था कि आयोग के समक्ष उनको अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला. Also Read - झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, High Court ने खारिज की याचिका

 

इस फैसले के बाद आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि विधायकों को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया था. अब अदालत ने इन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया है. चुनाव आयोग दोबारा इनकी अपील सुनेगा.

अदालत के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. आयोग ने कहा कि वह फैसला का अध्ययन करने के बाद कुछ कहेगा. अदालत के इस फैसले से आप में खुशी की लहर है. पार्टी इसे एक बड़ी जीत के रूप में देख रही है. शाम छह बजे केजरीवाल इस विधायकों से मिल सकते हैं.

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति चंद्र शेखर की पीठ ने 28 फरवरी को इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा. इस मामले में अदालत ने विधायकों, चुनाव आयोग और अन्य पक्षों की दलीलें सुनी थीं.

सुनवाई के दौरान विधायकों ने अदालत से कहा था कि कथित रूप से लाभ का पद रखने पर उन्हें अयोग्य ठहराए जाने का आयोग का आदेश ‘नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पूरा उल्लंघन’ है क्योंकि उन्हें आयोग के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका नहीं दिया गया.

विधायकों ने पीठ से यह भी आग्रह किया कि इस मामले को नए सिरे से सुनने के निर्देश के साथ वापस आयोग के पास भेजा जाए. उन्होंने उच्च न्यायालय में उनकी अयोग्यता को उस समय चुनौती दी थी जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आयोग की सिफारिशों को अपनी मंजूरी दे दी थी.