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जम्मू-कश्मीर के सांसदों के संसद में प्रवेश पर रोक की मांग करने वाली याचिका खारिज

उससे पहले दिन में बहस के दौरान सोनी ने अदालत से कहा था कि यह याचिका विचारयोग्य नहीं है.

Updated: February 3, 2020 11:30 PM IST

By PTI | Edited by Amit Kumar

जम्मू-कश्मीर के सांसदों के संसद में प्रवेश पर रोक की मांग करने वाली याचिका खारिज
Delhi High court reserves judgement on a batch of petitions relating to criminalisation of marital rape.

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया है कि जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बावजूद इस पूर्ववर्ती राज्य के सांसद अवैध रूप से अपनी सीटों पर बने हुए हैं. साथ ही, याचिका में उन्हें संसद में प्रवेश करने से रोकने की मांग भी की गई थी. संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से पेश हुए केंद्र सरकार के वकील अनिल सोनी ने बताया कि न्यायमूर्ति बृजेश सेठी ने इस सिलसिले में एक सेवानिवृत प्रोफेसर की याचिका खारिज कर दी.

उससे पहले दिन में बहस के दौरान सोनी ने अदालत से कहा था कि यह याचिका विचारयोग्य नहीं है. सोनी ने उच्च न्यायालय में कहा कि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त प्रोफेसर अब्दुल गनी भट को अदालत जाने से पहले संसदीय कार्य मंत्रालय के समक्ष इस मुद्दे को उठाना चाहिए था. अदालत ने दिन में दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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अदालत में पेश हुए भट्ट ने दलील दी कि जम्मू कश्मीर से राज्यसभा में चार और लोकसभा में छह सांसद सरकारी खजाने से अपने दर्जे से जुड़े वेतन एवं भत्ते का लाभ उठा रहे हैं. याचिकाकर्ता ने कहा कि कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला सहित जम्मू-कश्मीर के दस सांसद अब भी अवैध रूप से अपनी सीटों पर काबिज हैं.

याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई कि दसों सांसदों को संसद में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाए. उनकी तनख्वाह और अन्य सुविधाएं रोक दी जाएं. संसद ने पिछले वर्ष पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्रशासित क्षेत्रों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बांट दिया था.

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