नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) केंद्रीकृत एयर कंडीशनर की जगह पंखे लगाने पर विचार कर रहा है क्योंकि ऐसी आशंका है कि अगर कोई कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति एसी (एयर कंडीशनर) क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो उसके सांस के जरिए बाहर निकला वायरस वहां फैल सकता है और दूसरों को संक्रमित कर सकता है. उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक समिति चुनौतियों के समाधान के लिए एक चरणबद्ध योजना पर विचार-विमर्श कर रही है. समिति में चार न्यायाधीश शामिल हैं. Also Read - मध्य प्रदेश: कोरोना संक्रमण का आंकड़ा 8,283 तक पहुंचा, 385 में सबसे ज्यादा मौतें इंदौर में

न्यायमूर्ति हिमा कोहली की अध्यक्षता वाली समिति को लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने लॉकडाउन के बाद उच्च न्यायालय के भवनों में केंद्रीकृत एसी संयंत्र के कामकाज के बारे में अवगत कराया और बताया कि इसके लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए ताकि इससे कोरोना वायरस का प्रसार न हो. Also Read - लॉकडाउन के चलते इस राज्य के मंदिरों को हुआ 600 करोड़ का नुकसान, सालाना आय में आई बड़ी कमी

28 अप्रैल को आयोजित समिति की बैठक में पीडब्लूडी अधिकारियों द्वारा पेश की गयी रिपोर्ट रिपोर्ट के अनुसार, भले ही उच्च न्यायालय अल्ट्रावायलेट कीटाणुनाशक विकिरण उपकरणों की खरीद और उसे स्थापित करने पर बड़े पैमाने पर खर्च कर सकता है, लेकिन इससे भी वायरस से पूर्ण सुरक्षा की कोई गारंटी नही होगी. समिति में न्यायमूर्ति विपिन सांघी, राजीव शकधर और तलवंत सिंह शामिल हैं. Also Read - कोरोना: दिल्ली में संक्रमण के मामले 20 हज़ार पार, मरने वालों की संख्या भी 500 से ज्यादा

समिति को पीडब्लूडी के इंजीनियरों ने अवगत कराया गया कि ऐसा उपकरण केवल एएचयू में प्राप्त हवा को फिर से प्रसारित करने के लिए कीटाणुरहित कर सकता है और यदि कोई कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति केंद्रीकृत एयर कंडीशनिंग वाले क्षेत्र में प्रवेश करता है, इसकी फिर भी आशंका रहेगी कि उस व्यक्ति के सांस से निकले वायरस के कण भीतर की हवा में मौजूद रह सकते हैं और दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं.’ समिति को सुझाव दिया गया कि इस स्थिति में पंखें उपयोगी होंगे.