नई दिल्ली। गुरुवार को जेएनयू में हुए भारी हंगामे के बाद आज दिल्ली हाई कोर्ट ने छात्रसंघ को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने प्रशासन को आपात स्थिति में पुलिस की मदद लेने की भी इजाजत दी. कल हुए हंगामे के बाद जेएनयू ने आज दिल्ली हाई कोर्ट का रूख किया था. अपनी अर्जी में जेएनयू प्रशासन ने कहा था कि छात्र प्रशासनिक खंड के 100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन नहीं करने के उसके पूर्व के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं. याचिका में अदालत के आदेश का कथित रूप से उल्लंघन करने वाले छात्रों पर अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई थी. यह याचिका कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर के समक्ष आई. Also Read - दिल्ली में लॉकडाउन ही एकमात्र विकल्प? हाईकोर्ट ने कोरोना के रोकथाम पर पूछा सवाल

20 फरवरी तक मांगा जवाब Also Read - Lockdown In Delhi News Update: दिल्ली में तत्काल लॉकडाउन लगाने को लेकर हाईकोर्ट ने कही ये बात

हाई कोर्ट ने जेएनयूएसयू को नोटिस जारी करते हुए 20 फरवरी तक उससे जवाब देने को कहा. साथ ही अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जेएनयू छात्र वाइस चांसलर, प्रो वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और स्टाफ को एडमिन बिल्डिंग में प्रवेश करने से ना रोकें. अदालत ने कहा कि अगर परिसर में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति का अंदेशा हो तो जेएनयू प्रशासन पुलिस की मदद ले सकता है. Also Read - दिल्ली में कोरोना से बुरा हाल: मृतकों से भरे श्मशान, रात भर जलती हैं चिताएं, स्थिति डराने वाली

जेएनयू ने दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर में फिलहाल जो प्रदर्शन किया जा रहा है वो हाई कोर्ट के 9 अगस्त 2017 के आदेश का उल्लंघन है, जिसमें अदालत ने छात्रों को प्रशासनिक खंड के 100 मीटर के दायरे में कोई भी आंदोलन नहीं करने का निर्देश दिया था. छात्रों ने कल अनिवार्य हाजिरी पर कुलपति से मुलाकात की मांग करते हुए प्रशासनिक खंड को घेर लिया था और कर्मचारियों को इमारत से बाहर नहीं निकलने दिया था.

अटेंडेंस के मुद्दे पर हंगामा

अटेंडेंस के मुद्दे पर जेएनयू में छात्रों ने वीसी और स्टाफ को बंधक बना लिया था. ये हंगामा गुरुवार सुबह 11 बजे से शुरू हो गया था. छात्रों ने अटेंडेंस के मुद्दे पर एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक को घेर लिया. जेएनयू प्रशासन ने छात्रों का घेराव खत्म नहीं होने पर पुलिस बुलाने तक की चेतावनी दी लेकिन छात्र नहीं माने. जेएनयू रजिस्ट्रार ने छात्रों से घेराव खत्म करने अधिकारियों को घर जाने देने की भी अपील की.

वहीं, छात्रों का दावा था कि उन्होंने वीसी और बाकी अधिकारियों को बंधक नहीं बनाया है. इनका कहना था कि हम वीसी से मिलना चाहते हैं. हम सुबह से इंतजार कर रहे हैं. हमने कोई गेट बंद नहीं किया है, हम  सिर्फ उनका इंतजार कर रहे हैं.