नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने आईटीओ में नेशनल हेराल्ड परिसर खाली करने के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली हेराल्ड प्रकाशक एजेएल की याचिका गुरुवार को खारिज कर दी. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वी.के. राव की पीठ ने एसोसिएटिड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने आईटीओ परिसर खाली करने संबंधी केंद्र के निर्णय को चुनौती दी थी. पीठ ने कहा, ”हमने याचिका खारिज कर दी है.” Also Read - Whatsapp की नई प्राइवेसी पॉलिसी को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती, दी गई यह दलील...

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बता दें कि एजेएल ने एकल न्यायाधीश के 21 दिसंबर 2018 के आईटीओ स्थित परिसर को दो हफ्ते के अंदर खाली करने के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी. हाईकोर्ट की बेंच ने एजेएल के वकील के इस मौखिक अनुरोध को भी खारिज कर दिया कि उन्हें परिसर खाली करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाए. एकल न्यायाधीश ने आईटीओ स्थित परिसर दो हफ्ते के अंदर खाली करने का 21 दिसंबर 2018 को आदेश दिया था. इसके खिलाफ एजेएल ने याचिका दायर की थी.

गत 18 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वी के राव की एक पीठ ने केंद्र और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

इससे पहले एजेएल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश करते हुए कहा था कि कंपनी के बहुसंख्यक शेयर यंग इंडिया को हस्तांतरित होने से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी यहां स्थित हेराल्ड इमारत के मालिक नहीं बन जाएंगे. एजेएल के वकील यह भी दलील दी कि केंद्र ने जून 2018 से पहले हेराल्ड इमारत में मुद्रण गतिविधियों की कमी का कभी मुद्दा नहीं उठाया, तब तक जब इसके कुछ ऑनलाइन संस्करणों का प्रकाशन शुरू हो चुका था.

केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि जिस तरह से शेयरों का हस्तांतरण हुआ उसमें अदालत को यह देखने के लिए एजेएल पर पड़े कॉरपोरेट पर्दे के उस पार झांकना होगा कि -हेराल्ड हाउस- का स्वामित्व किसके पास है. एजेएल को हेराल्ड हाउस प्रिंटिंग प्रेस चलाने के लिये पट्टे पर दिया गया था. सरकार की तरफ से दलील दी गई कि जिस जमीन को लेकर सवाल है वह एजेएल को छापेखाने के लिए पट्टे पर दी गई थी और यह प्रमुख उद्देश्य सालों पहले ही खत्म हो चुका था.