तीन साल पहले, 16 दिसंबर, 2012 को निर्भया के साथ गैंगेरप हुआ था। चलती बस में 5 लोगों ने एक मेडिकल स्टूडेंट के साथ दरिंदगी की सारी इंतेहा पार कर दी थी। जख्मी हालत में उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक वो बिस्तर पर पड़ी जिंदगी और मौत की जंग लड़ती रही और आखिरकार उसकी मौत हो गई। इन तीन सालों में हमने क्या सीखा? क्या इन तीन सालों में कुछ भी बदल पाया है? यह सवाल सबसे अहम हो जाता है।Also Read - तिहाड़ जेल के 32 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज, Unitech के पूर्व प्रमोटर्स से सांठगांठ रखने का है आरोप

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निर्भया के साथ हुई इस हैवानियत के विरोध में दिल्ली सहित पुरे देश भर में लोग सड़कों पर उतर आए। लगातार मोर्चे निकलने लगे। इंडियागेट से लेकर जंतर-मंतर तक आम जनता का गुस्सा देखने को मिला। सभी लोग आरोपियों की गिरफ्तारी से लेकर कड़ी सजा की मांग पर अड़ गये। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी के साथ जमकर तोड़फोड़ हुई। पुलिस ने निर्भया के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इस घटना ने सुरक्षा की पोल खोल कर रख दी थी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निर्भया कांड के बाद दिल्ली में महिलाओं के साथ दरिंदगी रुकी है? क्या महिलाएं आज भी सुरक्षित हैं? Also Read - Delhi Terror Alert: दिल्ली को दहलाने की थी साजिश, पाकिस्तानी आतंकी गिरफ्तार, फर्जी पासपोर्ट-AK 47 बरामद

Nirbhaya Case 00

दिल्ली पुलिस ने इस घटना के बाद महिलाओं को तीन साल पहले भरोसा दिलाया था कि अब महिलाएं सुरक्षित रहेंगी। रात को बिना किसी डर के घरों से बाहर निकल सकती है। लेकिन आज भी महिलाएं दिल्ली में घरों से निकलने पर डरती हैं। यह  भी पढ़े-16/12 दुष्कर्म: अभी भी न्याय का इंतजार

इस घटना के बाद दुनिया भर में मीडिया ने सड़कों पर हुए प्रदर्शनों की तस्वीरें दिखाईं। रेप और मर्डर की जो खबरें कभी लोकल अखबारों के छठे या आठवें पन्ने पर छपा करती थीं, अब वे अंतरराष्ट्रीय अखबारों के पहले पेज पर दिखने लगी थीं। आज तीन साल बाद भले ही वे धीरे-धीरे खिसकती हुई तीसरे, पांचवें, सातवें या नवें पेज पर पहुंच गयी हों लेकिन आज भी लोगों के वो सवाल वहीं के वहीं हैं। यह  भी पढ़े-दिल्ली फिर हुई शर्मसार, 6 दरिंदों ने किया नाबालिग के साथ गैंगरेप

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दिल्ली में हाल ही में महिलाओं के साथ-साथ मासूम बच्चियों के साथ भी दरिंदगी के मामले सामने आए। कहीं दो साल की बच्ची को हैवानों ने अपनी बुरी नीयत का शिकार बनाया, तो कहीं पांच साल की बच्ची का बचपन रौंदा गया। दिल्ली में महिलाओं के साथ ज्यादती कम होने की बजाए लगातार बढ़ी है। इस बात के गवाह खुद रेप से संबंधित दिल्ली पुलिस के आंकड़े हैं।

साल

रेप की घटनाएं

 

2012

 

756

 

2013

 

1636

 

2014

2166

 

2015

1856 (अक्टूबर तक)

इन आंकड़ों से साफ है कि राजधानी में महिलाएं आज भी सुरक्षित नहीं हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर दिल्ली पुलिस ने तमाम नियम कानून बनाएं। दुर्भाग्यवश ये सारी चीजे धरी की धरी रह गयी। पुलिस ने नए मोबाइल एप्स लांच किए ताकि महिला किसी मुसीबत में हो तो फौरन उसके जरिए उसकी मदद की जा सके। हर थाने में महिलाओं की सुनवाई के लिए महिला हेल्प डेस्क बनवाई गई, बावजूद इसके स्थिति आज भी जस की तस है। यह  भी पढ़े-निर्भया की बरसी से एक दिन पहले इलाहाबाद हुआ शर्मशार, महिला से गैंगरेप कर की हत्या

इन तीन सालों में अगर हमने कुछ सीखा है तो वह है बातें करना, प्रदर्शन करना, कैंडल लाइट मार्च करना, फेसबुक पर लंबी-लंबी पोस्ट डालना, ट्विटर पर हैशटैग इस्तेमाल करना। लेकिन समाज को बदलना, अपराध का सफाया करना, क्या ये भी हमने सीखा है?

इस बात पर ध्यान देना बेहद जरूरी है कि अधिकतर नाबालिग अपराधियों की उम्र 16 से 18 के बीच है। निर्भया के साथ दुष्कर्म करने वाला एक लड़का भी इसी उम्र का था। आज, तीन साल बाद उसकी रिहाई की बात चल रही है। चार दिन बाद उसे एक एनजीओ के सुपुर्द कर दिया जाएगा। कुछ लोग उम्मीद जता रहे हैं कि वह एक अच्छे नागरिक में तब्दील होगा, तो कुछ अपराधी को छोड़ दिए जाने पर नाराज हैं। यह  भी पढ़े-दिल्ली में 7 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप

पिछले तीन साल में खूब बहस हुई है। कानून बने हैं, फंड दिए गए हैं। ऐसा नहीं है कि कोशिशें नहीं हुई। लेकिन सोच नहीं बदल पाई है। रात को घर से निकलते हुए एक लड़की को जो डर लगता है, वो वैसे का वैसा है। बेटी अगर देर तक घर ना लौटे, तो मां-बाप के दिल में जो पहला ख्याल आता है, वो भी तो आज नहीं बदला है।