नई दिल्ली: दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने शुक्रवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें सूचना मिली है कि कुछ इलाकों में पुलिसकर्मियों ने लॉकडाउन के दौरान मस्जिद की अजान रोकने के लिए कहा है. उन्होंने सरकार से अजान पर प्रतिबंध नहीं लगाने का आग्रह किया. उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान ने कहा कि ये खबरें द्वारका और दक्षिण दिल्ली जैसे क्षेत्रों से आई हैं. Also Read - Coronavirus Latest News: दिल्ली में पहली बार एक दिन में कोरोना संक्रमण के 1000 से अधिक मामले

आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली की सभी मस्जिदों में कोरोना वायरस को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों का सावधानीपूर्वक पालन किया जा रहा है और किसी भी मस्जिद में एक साथ चार से अधिक व्यक्तियों को नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है. उन्होंने कहा,‘‘रमजान के पाक महीने की शुरुआत में अजान को लेकर उठा यह मुद्दा काफी निराशाजनक है क्योंकि अजान सुनकर ही मुसलमान अपना रोजा शुरु करते हैं और शाम की अजान सुनने के बाद ही रोजा खोलते हैं.” खान ने अपने बयान में कहा कि कुछ मस्जिदों से पुलिसवालों ने लाउडस्पीकर कथित तौर पर हटवा दिए हैं. आयोग ने द्वारका और दक्षिण दिल्ली जिलों के पुलिस उपायुक्तों को नोटिस जारी कर कहा है कि वह इस तरह के किसी भी परिपत्र की एक प्रति प्रदान करें और यदि ऐसा नहीं है तो उन क्षेत्रों की मस्जिद में अजान की अनुमति दें. Also Read - Delhi Coronavirus Update: लॉकडाउन में ढील के बाद बढ़े केस, सीएम बोले, चिंता की बात नहीं, मामले 13 हजार के पार

इस बीच दिल्ली पुलिस ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के दिशानिर्देशों के अनुसार अजान की अनुमति दी गई है लेकिन लोगों से रमजान के दौरान लॉकडाउन मानदंडों का पालन करने का आग्रह किया गया है. पुलिस की यह अपील सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के बाद आई है जिसमें दो पुलिसकर्मी लोगों को कथित रूप से बता रहे हैं कि उपराज्यपाल के आदेश के अनुसार , लॉकडाउन में अजान की अनुमति नहीं दी गई है. खान और आयोग के सदस्य करतार सिंह कोचर द्वारा संयुक्त रूप से लिखे गए एक अन्य पत्र में उन्होंने दिल्ली में कोरोना वायरस संदिग्धों के लिए तैयार पृथक-वास केंद्रों के रखे गए लोगों की ‘‘दुर्दशा’’ का मुद्दा उठाया. Also Read - MCD नेताओं का आरोप: कोविड-19 से होने वाली मौतों की कम संख्या बता रही दिल्ली सरकार