
Rishabh Kumar
ऋषभ कुमार पाण्डेय डिजिटल मीडिया और खबरों की दुनिया में एक साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं. ऋषभ टेक और Off-Beat से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी रखते ... और पढ़ें
Lok Adalat: दिल्ली में एक बार फिर राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 10 जनवरी 2026 को किया जाएगा. इस दिन वाहन मालिकों को ट्रैफिक ई-चालान निपटाने का एक खास मौका मिलेगा. लोक अदालत दिल्ली के सभी जिला अदालत परिसरों में आयोजित होगी. इसका उद्देश्य रोजमर्रा के छोटे ट्रैफिक चालानों से परेशान आम लोगों को राहत देना है. इसमें केवल हल्के और समझौते योग्य मामलों को शामिल किया जाएगा, जबकि गंभीर और आपराधिक मामलों को लोक अदालत से बाहर रखा गया है.
लोक अदालत में शामिल होने के लिए वाहन मालिकों को ऑनलाइन टोकन रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है. इसके लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. वहां लोक अदालत आवेदन विकल्प चुनकर फॉर्म भरना होगा और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. आवेदन जमा करने के बाद टोकन नंबर ई-मेल या मोबाइल पर भेज दिया जाएगा. यह लिंक 5 जनवरी 2026 को सुबह 10 बजे से सक्रिय हो चुकी है. एक दिन में अधिकतम 45 हजार चालान डाउनलोड किए जा सकते हैं और कुल सीमा 1 लाख 80 हजार चालान तय की गई है. मामलों की सुनवाई टोकन नंबर के अनुसार ही होगी.
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद आवेदक को टोकन नंबर के साथ अपॉइंटमेंट लेटर दिया जाएगा, जिसमें तारीख, समय और कोर्ट परिसर की जानकारी होगी. सुनवाई के दिन यह लेटर साथ लाना अनिवार्य है. अधिकारियों की सलाह है कि लोग तय समय से कम से कम एक घंटा पहले कोर्ट पहुंचें, ताकि लंबी कतारों से बचा जा सके. वाहन मालिकों को वाहन की आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा, पीयूसी और चालान से जुड़े सभी मूल दस्तावेज साथ रखने होंगे. बिना दस्तावेज के मामला नहीं सुना जाएगा.
सबसे पहले वाहन मालिक को अपने पेंडिंग चालान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस वेबसाइट या परिवहन पोर्टल पर जांचने होंगे. इसके बाद यह देखना जरूरी है कि चालान लोक अदालत के लिए पात्र है या नहीं. केवल छोटे और कंपाउंड होने वाले चालान ही लिए जाएंगे. पात्र होने पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें, टोकन और अपॉइंटमेंट लेटर डाउनलोड करें और 10 जनवरी को तय अदालत में पहुंचें. लोक अदालत की बेंच मामले को सुनेगी और अपराध की प्रकृति के अनुसार जुर्माना कम किया जा सकता है या कुछ मामलों में माफ भी हो सकता है.
लोक अदालत में हेलमेट या सीट बेल्ट न पहनना, रेड लाइट जंप करना, ओवर-स्पीडिंग, गलत पार्किंग, वैध पीयूसी न होना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और नंबर प्लेट से जुड़े चालान शामिल हो सकते हैं. कुछ सीमित मामलों में बिना लाइसेंस ड्राइविंग भी शामिल की जा सकती है. वहीं शराब पीकर ड्राइविंग, हिट-एंड-रन, लापरवाही से मौत, नाबालिग द्वारा ड्राइविंग, अवैध रेसिंग, अपराध में इस्तेमाल वाहन, दूसरे राज्यों के चालान और पहले से नियमित अदालत में लंबित मामले लोक अदालत में नहीं लिए जाएंगे. यह लोक अदालत उन मामलों के लिए है, जिनसे जान को सीधा खतरा नहीं होता और जिन्हें आपसी समझौते से सुलझाया जा सकता है.
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