नई दिल्ली: दिल्‍ली के निर्भया गैंगरेप और मर्डर मामले में मौत की सजा का सामना कर रहे चार दोषियों में से एक विनय कुमार शर्मा ने बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के समक्ष दया याचिका दायर की. विनय की पैरवी कर रहे अधिवक्ता ए पी सिंह ने कहा कि उन्होंने उसकी ओर से राष्ट्रपति भवन में दया याचिका दायर की है और इस पर ‘प्राप्ति’ हासिल की है.

विनय की पैरवी कर रहे अधिवक्ता ए पी सिंह ने कहा, ”मैंने राष्ट्रपति के समक्ष विनय की दया याचिका दायर की है. मैंने यह स्वयं जाकर सौंपी है.” सुप्रीम कोर्ट विनय कुमार शर्मा की सुधारात्मक याचिका पहले ही खारिज कर चुका है.

विनय से पहले एक अन्य दोषी मुकेश कुमार सिंह ने दया याचिका दायर की थी जो राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी. शीर्ष अदालत ने बुधवार को मुकेश कुमार सिंह की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने राष्ट्रपति द्वारा अपनी दया याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के दोषी मुकेश कुमार सिंह की दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली उसकी अपील बुधवार को खारिज कर दी और कहा कि इस पर ‘त्वरित विचार’ का यह अर्थ नहीं निकलता कि इसमें राष्ट्रपति ने सोच-विचार नहीं किया. न्यायमूर्ति आर. भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की पीठ ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया और 2012 के निर्भया कांड के दोषी मुकेश के लिए अब कोई कानूनी रास्ता नहीं बचा है.

हालांकि तीन अन्य दोषियों पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार के पास अब भी विकल्प बचे हैं. उनकी सुधारात्मक याचिका शीर्ष अदालत द्वारा खारिज किए जाने के बाद ही वे राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल कर सकते हैं. इनमें से विनय कुमार शर्मा ने बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के समक्ष दया याचिका दायर कर दी है. अक्षय ने बुधवार को शीर्ष अदालत में सुधारात्मक याचिका दाखिल की है, जो अदालत में अंतिम विकल्प है. इस पर गुरूवार को सुनवाई होगी.

शीर्ष अदालत विनय की सुधारात्मक याचिका पहले ही खारिज कर चुकी है और चौथे दोषी पवन ने अभी सुधारात्मक याचिका दाखिल नहीं की है. शीर्ष अदालत ने आज मुकेश की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामले में अदालतों द्वारा दिए गए फैसलों, दोषी की आपराधिक पृष्ठभूमि, उसके परिवार की आर्थिक हालत समेत सभी दस्तावेजों पर राष्ट्रपति ने विचार किया और इसे खारिज किया.

बता दें कि अदालत ने चारों मुजरिमों -मुकेश, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार, को एक फरवरी को सुबह छह बजे मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाने के आदेश पर अमल के लिये आवश्यक वारंट जारी किए थे.