नई दिल्ली: तीस हजारी कोर्ट में वकीलों के साथ हुई मारपीट के बाद अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को विरोध प्रदर्शन पर उतरे दिल्ली पुलिस के कर्मियों का धरना यहां उच्चाधिकारियों से मिले आश्वासन के बाद रात आठ बजे समाप्त हो गया. यह जानकारी दिल्ली पुलिस के संयुक्त उपायुक्त देवेश श्रीवास्तव ने दी. करीब 10 घंटे के बाद दिल्ली पुलिस ने कमिश्नर के ठोस अश्वासन के बाद आखिरकार धरना खत्म कर दिया. इससे पहले दिल्ली पुलिस ने घोषणा की थी कि तीस हजारी कोर्ट में वकीलों के साथ हुई मारपीट के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस कर्मियों को विभाग 25,000 रुपये मुआवजा देगा. यह घोषणा दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त ने मंगलवार को की.

दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर सतीश गोलचा ने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों से कहा, “मैं आप सभी से निवेदन करता हूं कि कृपया अपनी ड्यूटी पर लौट जाएं. तीस हजारी कोर्ट में हुई हिंसक घटना में जितने पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, उन्हें कम से कम 25 हजार रुपए मुआवजा दिया जाएगा.”

दिल्ली पुलिस को मंगलवार को उस समय विद्रोह जैसे हालात का सामना करना पड़ा जब हजारों पुलिसकर्मियों ने पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और अपने मुखिया पुलिस आयुक्त के वापस जाने के अनुरोध को नकार दिया. पुलिसकर्मी साकेत अदालत के बाहर सोमवार को अपने एक साथी पर हुए हमले का विरोध कर रहे थे और उन्होंने हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की.

दिल्ली पुलिस के प्रदर्शन कर रहे कर्मियों ने अपनी मांगे रखते हुए कहा था कि पुलिसकर्मियों से मारपीट करने वाले वकीलों के लाइसेंस वापस लिए जाएं और पुलिस कर्मियों के खिलाफ निलंबन आदेश रद्द किए जाएं. हालांकि 10 घंटे के करीब चले इस प्रदर्शन के बाद पुलिस कर्मियों ने पुलिस कमिश्नर के ठोस अश्वासन के बाद धरना खत्म करने का फैसला किया.

पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच तनाव के हालात शनिवार से बनने शुरू हो गए थे जब पार्किंग को लेकर हुई झड़प में कम से कम 20 पुलिसकर्मी और कई वकील घायल हो गए थे.