Air quality remains in very poor category in Delhi: दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण की स्थिति अभी बेहद खराब है. मंगलवार सुबह में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है. वैसे राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को हवा की गति बढ़ने से प्रदूषक तत्वों के बिखर जाने के कारण वायु गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ था. वहीं पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं जारी रहीं. Also Read - Delhi Air Pollution Latest Updates: तेज हवाओं, पराली के कम जलने से दिल्ली की हवा हुई साफ, जानिए क्या रहा AQI

शहर का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 293 रहा जो ‘खराब’’ की श्रेणी में आता है. रविवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 364 था. दिल्ली में पीएम 2.5 प्रदूषक कणों में पराली जलाने की भागीदारी 40 प्रतिशत रही. Also Read - Delhi Air Pollution: Real-time Air Quality Index: दिल्ली-NCR में फिर गंभीर श्रेणी में पहुंची हवा की गुणवत्ता, इस बार पराली नहीं है कारण!

उल्लेखनीय है कि 0 और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है. Also Read - Delhi Pollution News: जहरीली हुई दिल्ल-एनसीआर की हवा, सांस संबंधी बीमारी के मरीजों में इजाफा

दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में रविवार को आग की घटनाओं को बड़े पैमाने पर देखा गया. इसका प्रभाव दिल्ली-एनसीआर और उत्तर पश्चिम भारत की वायु गुणवत्ता पर पड़ने की संभावना है. उसने कहा कि मंगलवार को हवा की तेज रफ्तार प्रदूषकों के बिखरने के लिए अनूकूल रहेगी.

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता निगरानी एजेंसी ‘सफर’ के अनुसार, सोमवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत थी. यह रविवार को 40 फीसदी पहुंच गई थी जो इस मौसम में सबसे ज्यादा है. दिल्ली के पीएम 2.5 में पराली जलाने की हिस्सेदारी शनिवार को 32 प्रतिशत, शुक्रवार को 19 फीसदी और बृहस्पतिवार को 36 प्रतिशत थी. ‘सफर’ के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल एक नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी जो सबसे ज्यादा थी.

उधर पंजाब में 21 सितंबर से दो नवंबर तक पराली जलाए जाने की पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 49 प्रतिशत अधिक घटनाएं हुई हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह जानकारी सामने आई है.

पंजाब सुदूर संवेदन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, इस धान के मौसम में राज्य में अब तक 21 सितंबर से 2 नवंबर तक पराली जलाने की 36,755 घटनाएं हुई हैं, जबकि 2019 में इसी अवधि में ऐसी घटनाओं की संख्या 24,726 थी.

राज्य में 2017 और 2018 में पराली जलाए जाने की घटनाओं की संख्या क्रमशः 29,156 और 24,428 रही थी. इस उत्तरी राज्य में कई किसान इस पर प्रतिबंध के बावजूद धान के पुआल को जला रहे हैं.

पंजाब में सोमवार को पराली जलाने की 3,590 घटनाएं सामने आई हैं.