नई दिल्ली: दिसंबर 2012 के निर्भया मामले के ठीक चार महीने बाद ही राष्ट्रीय राजधानी में एक और जघन्य घटना हुयी थी जिसमें पांच वर्षीय एक बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ. पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर इलाके में 2013 में हुयी इस बर्बर घटना के मामले में छह साल बाद फैसला आने की संभावना है और दिल्ली की एक अदालत शनिवार को इस मामले में फैसला सुना सकती है.

मामले से जुड़े एक वकील के अनुसार अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेश कुमार मल्होत्रा ​​ने बुधवार को फैसला टाल दिया था क्योंकि निर्णय लंबा होने के कारण तैयार नहीं हो सका था. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 24 मई, 2013 को दो आरोपियों – मनोज शाह और प्रदीप कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था और उसी साल 11 जुलाई को अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय किए थे. अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ नाबालिग से बलात्कार, अप्राकृतिक दुष्कर्म, अपहरण, हत्या की कोशिश, सबूत मिटाने और समान मंशा के साथ उसे रोककर रखने के आरोप तय किए थे. पॉक्सो कानून के तहत भी आरोप लगाए थे, जिसके तहत अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है.

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दोनों आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में
आरोपी मनोज शाह और प्रदीप बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसे मरा हुआ समझकर वहीं छोड़कर भाग गए थे. घटना के 40 घंटे बाद 17 अप्रैल 2013 में बच्ची को वहां से निकाला गया. लड़की मनोज के घर में मिली थी. बाद में दिल्ली पुलिस ने मनोज और प्रदीप को बिहार के मुजफ्फरपुर और दरभंगा से गिरफ्तार किया था. दोनों आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं. इस घटना के बाद शहर में इंडिया गेट, पुलिस मुख्यालय और अन्य जगहों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ था. हाथों में तख्तियां लिए हुए लोग एम्स के पास भी जुटे थे जहां लड़की का उपचार हुआ था. उस समय के दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार को बर्खास्त करने की मांग करते हुए उनका पुतला भी फूंका गया था.