नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने इस साल फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित मामले में गिरफ्तार किए गए जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को गुरुवार को 22 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद खालिद को वीडियो कांफ्रेंस के जरिये अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष पेश किया गया था. खालिद को 13 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने उनकी और हिरासत नहीं मांगी. Also Read - भारत सरकार ने हिजबुल चीफ सलाहुदीन समेत पाकिस्तान के 18 दहशतगर्दों को आतंकी घोषित किया, देखें पूरी लिस्‍ट

बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़कने के बाद सांप्रदायिक झड़पें शुरू हो गई थीं. इस दौरान कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे. Also Read - दिल्ली पुलिस की किरकिरी, डीसीपी का पीए छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार

पुलिस ने प्राथमिकी में दावा किया है कि सांप्रदायिक हिंसा ‘पूर्व-नियोजित साजिश’ थी, जिसे कथित रूप से खालिद और दो अन्य लोगों ने अंजाम दिया था. खालिद के खिलाफ राजद्रोह, हत्या, हत्या का प्रयास, धर्म के आधार पर विभिन्न समुदायों के बीच द्वेष पैदा करने और दंगा भड़काने के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है. उस पर कठोर आतंकवाद रोधी कानून, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत भी केस दर्ज किया गया था. Also Read - JNU Reopening News: इस तारीख से खुलेगा जेएनयू, लेकिन केवल इन छात्रों को मिलेगी एंट्री

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि खालिद ने कथित रूप से दो अलग-अलग जगहों पर भड़काऊ भाषण दिए और लोगों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान सड़कों पर उतरने और उन्हें जाम करने की अपील की ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दुष्प्रचार किया जा सके कि भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है.

एफआईआर के मुताबिक, इस षड़यंत्र को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कई घरों में हथियार, पेट्रोल बम, तेजाब की बोतलें और पत्थर जमा किए गए. पुलिस का आरोप है कि सह-आरोपी दानिश को दो अलग-अलग जगहों पर लोगों को जमा करने और दंगा भड़काने की जिम्मेदारी दी गई थी.

प्राथमिकी में कहा गया है कि 23 फरवरी को महिलाओं और बच्चों को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे सड़क बंद करने के लिए कहा गया ताकि आसपास रह रहे लोगों के बीच तनाव उत्पन्न किया जा सके.