नई दिल्ली: देश की राजधानी और आसपास के शहरों में प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार ने हेल्थ इमरजेंसी लगा दी है.  सरकार ने पांच नवम्बर तक सभी स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए हैं और सभी प्रकार के निर्माण कार्यों पर भी रोक लगी दी है. प्रदूषण से बचने के लिए लोग बाहर न टहलें और बाहर कसरत न करें. प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) सड़कों के ऊपर जमी धूल पर पानी का छिड़काव कर रही है. वहीं दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने धूल इकट्ठा करने के लिए यांत्रिक स्वीपरों  और पानी स्प्रे करने के लिए अतिरिक्त टैंकरों को तैनात किया है.


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई सुबह 10 बजे क्रमश: 459 और 452 रहा. कल शुक्रवार शाम चार बजे यह 496 था. मौसम विशेषज्ञों ने कहा कि हवा की गति में थोड़ा सुधार है और धीरे-धीरे यह बढ़ सकती है. रविवार से मंगलवार तक इस क्षेत्र में 20-25 किलोमीटर प्रति घंटे तक हवाएं चलने की संभावना है.


मौसम कार्यालय ने कहा कि चक्रवात ‘महा’ और ताजा पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में सात और आठ नवम्बर को बारिश होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि हालांकि हल्की बारिश होगी लेकिन यह जल रही पराली के प्रभाव को कम करने के संदर्भ में महत्वपूर्ण होगी और प्रदूषकों को भी दूर करेगी.


इस साल जनवरी से पहली बार गुरुवार रात दिल्ली में एक्यूआई ‘बेहद गंभीर’ या ‘आपात’ स्तर में पहुंचा था. एक्यूआई 0-50 के बीच ‘अच्छा’, 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101-200 के बीच ‘मध्यम’, 201-300 के बीच ‘खराब’, 301-400 के बीच ‘अत्यंत खराब’, 401-500 के बीच ‘गंभीर’ और 500 के पार ‘बेहद गंभीर एवं आपात’ माना जाता है.


दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी ट्वीट कर हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने से होने वाले धुंए की वजह से दिल्ली के गैस चेंबर में तब्दील होने की बात कही थी. सरकारी एजेंसी ‘सफर’ ने कहा था कि दिल्ली में प्रदूषण में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की हिस्सेदारी शुक्रवार को बढ़कर 46 प्रतिशत हो गई.