नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति से चिंतित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को दंगा प्रभावित उत्तर पूर्वी दिल्ली में हालात सामान्य बनाने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों ने बुधवार को इस बारे में बताया. सांप्रदायिक हिंसा में कम से कम 22 लोगों की जान गई है और कई लोग घायल हुए हैं. Also Read - PM मोदी के #9Minutesat9PM कार्यक्रम के दौरान पटाखे फोड़ने वालों पर भड़के गौतम गंभीर

अधिकारियों ने बताया कि जिम्मेदारी मिलने के तुरंत बाद डोभाल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक और नव नियुक्त विशेष आयुक्त एस एन श्रीवास्तव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देर रात में दौरा किया. Also Read - कोरोनावायरसः पुलिस ने खाली कराया शाहीन बाग, सौ दिन से चल रहा था CAA के खिलाफ प्रोटेस्ट

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने जाफराबाद और सीलमपुर सहित उत्तर-पूर्वी दिल्ली के प्रभावित इलाकों का दौरा किया. वहां पर उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और जरूरी निर्देश दिए . इसके अलावा माहौल शांत करने के लिए अलग-अलग समुदायों के नेताओं से भी भेंट की. Also Read - Janta Curfew की वजह से आमदनी को लेकर परेशान रिक्शेवालों की मदद को आगे आए वाशिंगटन सुंदर

अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरे के समय ही राष्ट्रीय राजधानी में भड़की हिंसा पर लगाम लगाने में नाकामी पर पटनायक के आलोचनाओं में घिरने के बाद माना जा रहा है कि डोभाल ने श्रीवास्तव को खुद चुना है.दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है.

हिंसा प्रभावित इलाकों में जमीनी हालात का मुआयना करने के बाद डोभाल ने बुधवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) को सांप्रदायिक दंगे के शिकार हुए इलाकों की स्थिति के बारे में अवगत कराया. उन्होंने सीसीएस को हिंसा को शांत करने और जल्द से जल्द हालात सामान्य बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताया.

प्रधानमंत्री के अलावा, सीसीएस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर हैं. खुफिया ब्यूरो के पूर्व प्रमुख डोभाल (75) मुश्किल हालात से निपटने के लिए जाने जाते हैं. उन्हें प्रधानमंत्री का विश्वस्त भी माना जाता है.

पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म किए जाने के बाद डोभाल ने एक पखवाड़ा से ज्यादा समय तक जम्मू कश्मीर में रहकर हालात की निगरानी की थी.