Delhi Violence: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के ब्रिजपुरी इलाके में स्थित एक निजी स्कूल में हिंसा का असर दिख रहा है. हिंसा से प्रभावित यह स्कूल अब टूटे डेस्कों तथा जली किताबों का ढेर बन कर रह गया है. इस स्कूल में एक बोर्ड है जो आधा जला हुआ है और उस पर लिखा है- ”सबसे खुशहाल स्कूल में आपका स्वागत है.” Also Read - कोरोनावायरसः पुलिस ने खाली कराया शाहीन बाग, सौ दिन से चल रहा था CAA के खिलाफ प्रोटेस्ट

ब्रिजपुरी में स्थित इस स्कूल का नाम अरुण मोर्डन सीनियर सेकेंडरी स्कूल है, जो 32 साल पुराना है और अब यह देखने में किसी कब्रिस्तान से ज्यादा नजर नहीं आता. स्कूल के अधिकारी दावा करते हैं कि करीब 70 लाख रुपए के नुकसान का आकलन किया गया है. Also Read - दिल्‍ली के शाहीन बाग धरनास्थल पर फेंका गया पेट्रोल बम

स्कूल की प्रिंसीपल ज्योति रानी ने बताया, स्कूल में जो कुछ हुआ उससे मैं अब तक उबर नहीं पाई हूं. मेरे लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि जिस वक्त स्कूल में यह सब हुआ उस समय परिसर में बच्चे मौजूद नहीं थे. मैं इसकी कल्पना भी नहीं करना चाहती कि अगर स्कूल में उस समय बच्चे होते तो क्या होता.’’ Also Read - जनता कर्फ्यू में शामिल नहीं होंगी शाहीन बाग की दादियां, कहा- यहां मरना पसंद करूंगी

प्रिंसीपल ज्योति रानी ने बताया, मंगलवार की शाम हमारा सुरक्षा गार्ड वहां मौजूद था जब भीड़ ने स्कूल परिसर में प्रवेश किया. घटना की आशंका से डरा गार्ड अपनी जान बचाने के लिए बाहर भाग गया. इसके दो दिन बाद कहीं जाकर हम स्कूल जाने की हिम्मत जुटा सके हैं. यहां टूटी डेस्क, पुस्तकालय में जली पुस्तकें नजर आ रही हैं, हर जगह गड़बडी है. अब यह देखने में कब्रिस्तान से कम नहीं लगता है.

स्कूल के मालिक भीष्म शर्मा ने बताया कि दंगाईयों ने 70 लाख रुपए मूल्य की पुस्तकें जला डाली है. उन्होंने बताया, ”इस स्कूल का परिचालन 1987 से किया जा रहा है. यह घटना मंगलवार की शाम पांच बजे हुई. वे आए और उन्होंने सबकुछ जला दिया. हमने 30 साल का रिकार्ड खो दिया. जिस एक बात के लिए हमें राहत है वह है कि हादसे के वक्त स्कूल में बच्चे नहीं थे, नहीं तो बहुत बड़ा नुकसान होता.”

इसी तरह की तोड़ फोड़ की स्थिति कई स्कूलों में देखी जा सकती है, इसमें डीपीआर स्कूल, राजधानी पब्लिक स्कूल आदि शामिल है जहां दंगाइयों ने पुस्तकालयों को आग के हवाले कर दिया.

बता दें कि संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ और पक्ष में प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच टकराव से चार दिन पहले इस इलाके में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी. भीड़ ने मकानों, दुकानों और वाहनों को आग के हवाले करने के साथ ही एक पेट्रोल पंप को आग लगा दी थी. साथ ही स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों पर पथराव भी किया गया था.