नई दिल्ली: संशोधित नागरिकता कानून के विरोध प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप पिछले महीने उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुई साम्प्रदायिक हिंसा की निंदा करते हुए माकपा नेता सीताराम येचुरी ने सोमवार को अदालत की निगरानी में तय समयसीमा में इसकी स्वतंत्र जांच की मांग की. येचुरी ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा की कड़ी निंदा की जानी चाहिए. इस घटना की अदालत की निगरानी में स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. इस हिंसा के अपराधियों को कानून के तहत कड़ी सजा मिलनी चाहिए.’’ Also Read - दिल्‍ली के शाहीन बाग धरनास्थल पर फेंका गया पेट्रोल बम

उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो फुटेज में दिखाया गया है कि कैसे पुलिस ने हिंसक हमले करने वाले अपराधियों का सहयोग करके उन्हें बढ़ावा दिया. इसकी समयबद्ध तरीके से न्यायिक जांच की जानी चाहिए.’’ Also Read - CBSE Class 10th 12th Board Exam 2020: CBSE ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली परीक्षा केंद्रों के लिए जारी किया नया टाइम टेबल, यहां देखें 10वीं,12वीं बोर्ड परीक्षा की डिटेल

बता दें कि बुद्धिजीवियों के एक समूह द्वारा दिल्ली हिंसा पर तैयार की गई तथ्यान्वेषी रपट में दावा किया गया है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा ‘सुनियोजित साजिश’ थी. इस समूह ने अपनी रिपोर्ट में इन हिंसा की राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने की बात भी कही है. इस रपट में पीड़ितों के पुनर्वास की सिफारिश की गई है और केन्द्र सरकार से लोगों में विश्वास बहाली के कदम उठाने का भी आग्रह किया गया है. Also Read - उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के बारे में अभी तय नहीं किया : उप्र सरकार

ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल एंड एकेडेमीज (जीआईए) की रिपोर्ट ‘दिल्ली रॉयट्स, 2020 – रिपोर्ट फ्रॉम ग्राउंड जीरो’ में कहा गया है कि ये हिंसा एक शहरी नक्सल-जिहादी नेटवर्क का सबूत था, जिसने दंगों की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया. “दिल्ली हिंसा, 2020 पूर्व नियोजित थी. ‘क्रांति के वामपंथी-जिहादी मॉडल’ के सबूत मिले हैं, जिन्हें दिल्ली में अंजाम दिया गया है और इसे अन्य स्थानों पर दोहराए जाने की भी कोशिश है.” रपट में कहा गया है कि दिल्ली हिंसा नरसंहार नहीं था. यह दिल्ली के विश्वविद्यालयों में काम कर रहे वामपंथी अर्बन नक्सल नेटवर्क द्वारा अल्पसंख्यकों के सुनियोजित और व्यवस्थित कट्टरपंथी विचारधारा का एक दुखद परिणाम है. इससे दोनों समुदायों को बहुत नुकसान हुआ है.