नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने की राज्य सरकार की योजना सिरे चढ़ती नजर आ रही है. दिल्ली सरकार के इसी साल बजट में किए गए वादे के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में चलने के लिए 3 इलेक्ट्रिक बसें (Electric bus) आ गई हैं. इन तीनों बसों को अगले 3 महीनों तक दिल्ली की सड़कों पर दौड़ाया जाएगा. 3 महीने के ट्रायल के बाद ही राज्य सरकार इन लो-फ्लोर बसों को दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के बेड़े में शामिल करने का फैसला करेगी. बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए उनकी सरकार इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना पर काम कर रही है. इसके तहत बीते जुलाई में सरकार ने 1 हजार इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति की थी.

3 अलग-अलग कंपनियों की बसें
दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने अंग्रेजी अखबार फाइनेंशियल एक्सप्रेस के साथ बातचीत में बताया कि ट्रायल के लिए तीन अलग-अलग कंपनियों की इलेक्ट्रिक बसें मंगाई गई हैं. इन तीनों बसों के ट्रायल के बाद मिले नतीजों के आधार पर सरकार यह फैसला लेगी कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए ये बसें चलने लायक हैं या नहीं. बता दें कि इससे पहले मार्च 2016 में दिल्ली सरकार ने चीन की कंपनी द्वारा बनाई गई एक ई-बस ट्रायल के लिए मंगाई थी. लेकिन शुरुआती 3 महीनों के परीक्षण में इसके सही नतीजे न मिलने के बाद बस को वापस कर दिया गया. दिल्ली में 1 हजार ई-बस खरीदने पर करीब 2500 करोड़ रुपए की लागत आएगी. सीएम केजरीवाल ने कोर्ट को बताया था कि हर बस की कीमत करीब ढाई करोड़ रुपए होगी.

Electric-Bus-Delhi

हाईड्रोजन फ्यूल वाली बसें लाने पर भी विचार
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट को सूचना दी थी कि राष्ट्रीय राजधानी में ई-बस के परिचालन के अलावा उनकी सरकार हाईड्रोजन-फ्यूल पर चलने वाली बसों को लाने पर भी विचार कर रही है. दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया था कि इन बसों के परिचालन में ई-बस या सीएनजी बसों के मुकाबले कम खर्च लगता है. दिल्ली सरकार के अनुसार, ई-बसों का आकार 9 मीटर से लेकर 12 मीटर लंबा हो सकता है. इन बसों के ट्रायल के बाद इस बाबत नियुक्त कंसल्टेंट अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे, जिसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट को ई-बसों के परिचालन के संबंध में फाइनल-रिपोर्ट दी जाएगी. दिल्ली में ई-बस चलाने की योजना को लेकर सीएम केजरीवाल ने बीते दिनों कहा था कि दिल्ली के परिवहन क्षेत्र को आधुनिक बनाने और प्रदूषण घटाने दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा.