नई दिल्ली: निर्भया दुष्कर्म और हत्याकांड के मुजरिमों की फांसी के अंतिम फैसले पर मुहर लगने का वक्त जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, इस मामले से जुड़ी कोई न कोई नई जानकारी बाहर आ रही है. अब जानकारी मिली है कि निर्भया के दोषियों को 1 फरवरी को दी जाने वाली फांसी मेरठ के पुश्तैनी जल्लाद पवन देंगे. इसके लिए तिहाड़ जेल प्रशासन ने यूपी सरकार से अनुरोध कर पवन को दिल्ली भेजने के लिए कहा है. तिहाड़ जेल के डीजी आनंद कुमार ने कहा, “दिल्ली की तिहाड़ जेल ने 2012 के दिल्ली गैंगरेप मामले के दोषियों को फांसी देने के लिए मेरठ के जल्लाद पवन की सेवाएं लेने का अनुरोध किया है. ये फांसी 1 फरवरी को होनी है.” बता दें कि उप्र के मेरठ शहर निवासी पवन कुमार पुश्तैनी जल्लाद हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ समय पहले जल्लाद पवन को जेल अफसरों ने तमाम हिदायतें दी थीं कि वे मीडिया में किसी तरह के बयान न दें. हालांकि पहले उनका नाम स्पष्ट नहीं था लेकिन अब तिहाड़ जेल के डीजी ने इस पर मुहर लगा दी है.


मामले की बात करें तो उच्चतम न्यायालय निर्भया बलात्कार एवं हत्या मामले में मौत की सजा पाए एक दोषी की उस याचिका पर 20 जनवरी को सुनवाई करेगा जिसमें उसके नाबालिग होने के दावे को उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है. दोषी पवन गुप्ता का दावा है कि अपराध के वक्त वह नाबालिग था. न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ पवन कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करेगी.

गुप्ता ने अपनी याचिका में दावा किया था कि दिसंबर 2012 में अपराध के वक्त वह नाबालिग था, जिसे उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था. इसके बाद गुप्ता ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.

गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने मामले के चार दोषियों – विनय शर्मा (26), मुकेश कुमार (32), अक्षय कुमार (31) और पवन (25) के खिलाफ एक फरवरी के लिए शुक्रवार को फिर से मृत्यु वारंट जारी किए. इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी. अन्य तीन दोषियों ने दया याचिका दायर करने के संवैधानिक उपाय का फिलहाल इस्तेमाल नहीं किया है. शीर्ष अदालत ने 14 जनवरी को विनय और मुकेश की सुधारात्मक याचिकाएं खारिज कर दी थी. दो अन्य दोषियों – अक्षय और पवन ने शीर्ष अदालत में अब तक सुधारात्मक याचिकाएं दायर नहीं की है.

दिल्ली में सात साल पहले 16 दिसंबर की रात को एक नाबालिग समेत छह लोगों ने चलती बस में 23 वर्षीय छात्रा से सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बस से बाहर सड़क के किनारे फेंक दिया था. सिंगापुर में 29 दिसंबर 2012 को एक अस्पताल में पीड़िता की मौत हो गयी थी. मामले में एक दोषी राम सिंह ने यहां तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. आरोपियों में से एक नाबालिग था, जिसे किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया था और तीन साल की सजा के बाद उसे सुधार गृह से रिहा किया गया था.