नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी को जायज ठहराते हुए मंगलवार को कहा था कि देश से भ्रष्टाचार के दीमक को साफ करने और बैंकिंग सिस्टम में पैसा वापस लाने के लिए नोटबंदी जैसी बड़ी तेज दवाई का उपयोग करना जरूरी था. हालांकि 2 साल पहले नवंबर 2016 में लिए गए फैसले को लेकर कृषि मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि किसानों पर नोटबंदी के फैसले का काफी बुरा असर पड़ा था. वित्त मंत्रालय से जुड़ी संसद की एक स्थायी समिति की बैठक में कृषि मंत्रालय ने माना है कि कैश की कमी के चलते लाखों किसान, रबी सीजन में बुआई के लिए बीज-खाद नहीं खरीद सके. जिसका उनपर काफी बुरा असर पड़ा. कृषि मंत्रालय ने नोटबंदी के असर पर एक रिपोर्ट भी संसदीय समिति को सौंपी है.

1984 सिख दंगे मामले में अदालत ने सुनाई पहली फांसी, राजनीतिक पार्टियों ने जताई खुशी

नोटबंदी पर रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट किया, नोटबंदी ने करोड़ों किसानों का जीवन नष्ट कर दिया हैं. अब उनके पास बीज-खाद खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा भी नहीं है. लेकिन आज भी मोदी जी हमारे किसानों की दुर्भाग्य का मजाक उड़ाते हैं. अब उनका कृषि मंत्रालय भी कहता है, नोटबंदी से टूटी किसानों की कमर!

कृषि मंत्रालय ने समिति को बताया कि नोटबंदी जब लागू हुई तब किसान या तो अपनी खरीफ की पैदावार बेच रहे थे या फिर रबी फसलों की बुआई कर रहे थे. ऐसे समय में किसानों को कैश की बेहद जरूरत होती है, लेकिन उस समय कैश की किल्लत के चलते लाखों किसान बीज और खाद नहीं खरीद सके. कृषि मंत्रालय ने रिपोर्ट में कहा है कि बड़े किसानों को भी खेती के कामों का मेहनताना देने और खेती की जरूरतों को पूरा करने में दिक्कत का सामना करना पड़ा था.

1984 सिख विरोधी दंगा पीड़ितों ने कहा: फैसले के बाद उड़ने वाली है सज्जन कुमार, टाइटलर की नींद

मंत्रालय ने बताया कि कैश की किल्लत के चलते राष्ट्रीय बीज निगम के लगभग 1 लाख 38 हजार क्विंटल गेहूं के बीज नहीं बिक पाए थे. हालांकि सरकार ने बाद में गेहूं के बीज खरीदने के लिए 1000 और 500 रुपए के पुराने नोटों के इस्तेमाल की छूट दे दी थी. कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की इस छूट के बाद भी बीज के बिक्री में कोई खास तेजी नहीं आई थी.