हैदराबाद। राज्यसभा उपसभापति चुनाव ने एक बार फिर सियासी समीकरण बदलकर रख दिया है. अब तक विपक्ष के पाले में समझे जाने वाले कुछ दलों ने एनडीए उम्मीदवार हरिवंश का साथ देकर बाजी पलट दी. एनडीए की रणनीति के आगे विपक्ष के उम्मीदवार बी के हरिप्रसाद को हार का मुंह देखना पड़ा. अब एक दूसरे पर वार-पलटवार का खेल भी शुरू हो गया है.Also Read - क्‍या शिवसेना कांग्रेस के नेतृत्‍व वाले UPA में होगी शामिल? संजय राउत ने दिया ये जवाब

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तीन पार्टियों ने दिया हरिवंश का साथ Also Read - नागालैंड हिंसा: राहुल गांधी ने केंद्र को घेरा, कहा- सैनिक और आम लोग सुरक्षित नहीं, गृह मंत्रालय क्या कर रहा है?

तीन प्रमुख पार्टियों ने उपसभापति चुनाव में हरिवंश का साथ देकर मुकाबले का रुख ही मोड़ दिया. ये पार्टियां हैं टीआरएस, बीजेडी और अन्नाद्रमुक. अब इन तीनों दलों को बीजेपी में संभावित दोस्त नजर आ रहा है जो 2019 के चुनाव में उसके खेमे में आ सकता है. एनडीए उम्मीदवार की जीत ने विपक्षी एकता की मुहिम को भी तगड़ा झटका दिया है.

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तेलंगाना में सत्तारूढ़ टीआरएस को बीजेपी 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद एक संभावित सहयोगी के तौर पर देखती है जिसने राज्यसभा के उपसभापति के लिए आज हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार हरिवंश का समर्थन किया. ऐसा संकेत भाजपा की प्रदेश इकाई के एक नेता ने दिया.

संभावित दोस्त बताया

आज दिन में हुए राज्यसभा चुनाव में एनडीए उम्मीदवार हरिवंश का समर्थन करने वाले दलों बीजेडी, टीआरएस और अन्नाद्रमुक को तेलंगाना भाजपा प्रवक्ता कृष्ण सागर राव ने लोकसभा चुनाव या उसके बाद सत्ताधारी गठबंधन के नए संभावित मित्र बताया.

हालांकि, राव ने साथ यह भी कहा कि टीआरएस ने स्पष्ट किया है कि एनडीए को उसका समर्थन मुद्दा आधारित है. उन्होंने इस संबंध में जीएसटी और राष्ट्रपति चुनाव में टीआरएस के समर्थन का उल्लेख किया. उनके अनुसार हो सकता है कि टीआरएस ने आज के चुनाव को उन मुद्दों में से एक माना हो. राव ने दावा किया कि अगले साल के आम चुनाव के बाद कई ऐसे मित्र हो सकते हैं जो एनडीए में शामिल होना चाहेंगे क्योंकि सत्ताधारी गठबंधन की सत्ता में वापसी तय है.

तीसरे मोर्चे की मुहिम को झटका

बता दें कि चंद्रशेखर राव ही वो शख्स हैं जिन्होंने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी से मुलाकात कर तीसरे मोर्चे की मुहिम को आगे बढ़ाया था. उन्होंने दूसरे क्षेत्रीय दलों के नेताओं से भी चर्चा कर एकजुट क्षेत्रीय दलों की ताकत दिखाने का फॉर्मूला दिया था. हालांकि, वह कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथग्रहण कार्यक्रम में किन्हीं वजहों से नहीं पहुंचे थे जहां राहुल गांधी, शरद पवार, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, चंद्रबाबू नायडू समेत तमाम विपक्षी नेता नजर आए थे. टीआरएस के कदम से तीसरे मोर्चे की इस मुहिम को स्वभाविक तौर पर झटका लगा है.