डेरा सच्चा सौदा चीफ राम रहीम ने बोला है कि उन्होंने अकाली-बीजेपी को समर्थन देने की बात नहीं की है। पंजाब में धार्मिक डेरों के राजनीतिक प्रभाव और भूमिका हमेशा से चर्चा का विषय रही है। चुनाव लोकसभा का हो या फिर विधानसभा चुनाव, इन धार्मिक डेरों का अपना अलग प्रभाव औऱ समर्थक दल होता है। लेकिन ऐसे में राम रहीम ने अपने बयान से लोगों को चौंका दिया है। क्योंकि हाल ही में खबर आयी थी कि डेरा सच्चा सौदा ने अकाली-बीजेपी को समर्थन दिया है।

आपको बता दें कि अभी तक खबरें आ रही थी कि बाबा राम रहीम ने पंजाब चुनाव में अकाली बीजेपी गठबंधन को समर्थन देने का फैसला कर लिया है। पंजाब में करीब 35 लाख परिवार में बाबा राम रहीम की पकड़ है। मालवा इलाके में बाबा राम रहीम के भक्त बड़ी संख्या में हैं। मालवा में विधानसभा की कुल 69 सीटें हैं और 40 पर डेरा का प्रभाव है।

मालवा पंजाब का दलित बहुल इलाका है। पंजाब में 33 फीसदी आबादी दलित समुदाय की है। सिख समुदाय और डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों में संबंध ठीक नहीं हैं। 2007 में पोशक विवाद को लेकर खूनी संघर्ष हो चुका है। इसके बाद पंजाब में सिखों ने राम रहीम का सामाजिक बहिष्कार किया था।
यह भी पढ़ें: यूपी चुनाव 2017 : BJP के स्टार प्रचारकों में वरुण गांधी और योगी आदित्यनाथ को भी मिली जगह

पंजाब में विधानसभा की कुल 117 सीटें हैं। 4 फरवरी को 1 करोड़ 92 लाख 14 हजार वोटर 1146 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे। वोटिंग के लिए कुल 22 हजार 600 बूथ बनाए जाएंगे। पंजाब में अकाली गठबंधन, कांग्रेस और आप में त्रिकोणीय मुकाबला है। 2012 में अकाली गठबंधन को 68 सीटों पर जीत मिली थी। यहां 32-33 फीसदी दलित वोटर हैं जबकि 21 फीसदी जट सिख वोटर हैं।

पंजाब में धार्मिक डेरों को इतिहास करीब चार सौ साल पुराना है। समय के साथ यह बढ़ते गए और इनका सामाजिक धार्मिक प्रभाव भी पंजाब की करीब एक तिहाई सीटों पर यह डेरे निर्णायक स्थिति में माने जाते हैं। इसमें अकाली दल के समर्थक डेरे भी हैं, तो दलितों एवं पिछड़ों के प्रभाव वाले भी। राजनीतिक दल भी इनका इस्तेमाल अपने लिए करते रहे हैं।

पंजाब में इस बार भी डेरों के प्रभाव से कोई इनकार नहीं कर सकता है। नेता भी यहां हाजरी लगाने से नहीं चूक रहे हैं। हालांकि कई डेरों ने अपनी राय अभी जाहिर नहीं की है। लेकिन नेता अभी से ही उनको अपने पाले में लेने के जतन कर रहे हैं।

पंजाब में डेरा सच्चा सौदा का असर सबसे अधिक एवं व्यापक माना जाता है। इसकी बकायदा राजनीतिक शाखा भी काम करती है। राज्य की राजनीति में इसका भारी दखल माना जाता है।