Desert Locusts Attack: पाकिस्तान से भारत में आए टिड्डियों (desert locusts) ने बीते दिनों जयपुर पर धावा बोला था. धीरे धीरे कर ये राजधानी दिल्ली समेत देश के कई अन्य राज्यों में अपना असर दिखाने लगे हैं. इनसे फसलों को नुकसान हो इस कारण भारतीय अधिकारी फसलों को तबाह करने वाले इन रेगिस्तानी टिड्डों के झुंडों से लड़ने के लिए किसानों की मदद करने में जुट गए हैं. ये फसलों को टिड्डों (locusts) से बचाने के लिए कीटनाशक अभियान चलाने में किसानों की मदद कर रहे हैं. नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र ने कहा कि टिड्डियों के खिलाफ अभियान में 700 ट्रैक्टर, 75 दमकल की गाड़िया, और लगभग 50 अन्य वाहनों को इस्तेमाल में लाया जाएगा. इनकी मदद से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाएगा. यही नहीं इस समस्या से बेहतर ढंग से निपट सकें इसके लिए ड्रोन्स की भी तैनाती की जाएगी. बता दें कीटनाशकों के छिड़काव में ड्रोन काफी मददगार साबित होगा. ड्रोन से एयर सर्विलांस के जरिए कीटनाशकों का छिड़काव किया जाएगा. इसके लिए रोटेटरी विंग वाले ड्रोन को काम में लिया जाएगा. इसमें एक बार में 25 किलों तक के वजन को उठाने की क्षमता होती है.Also Read - Rajasthan: अलवर की 15 साल की लड़की के साथ निर्भया जैसी बर्बरता? निजी अंगों में गंभीर चोट, ढाई घंटे चला ऑपरेशन

उन्होंने हालात ज्यादा नहीं बिगड़े हैं. टिड्डियों के आतंक पर काबू पाया जा सकता है लेकिन अगर यह जारी रहा तो अगली फसलों के लिए यह बुरा साबित हो सकता है. महापात्र ने कहा कि सर्दियों की ज्यादातर फसलों की कटाई भी अब खत्म हो चुकी है, ऐसे में अगर अभी कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा तो रेगिस्तानी टिड्डियों का प्रभाव कम हो जाएगा. अबतक 6 राज्यों में 42000 हेक्टेयर यानी 1,04,000 एकड़ की फसलें रेगिस्तानी टिड्डियों के कारण प्रभावित हो चुकी हैं. इनमें कपास, गर्मी के मौसम वाली दाल, और सब्जियों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है. कृषि मंत्रालय की मानें तो अबतक 6 राज्यों में टिड्डियों का आतंक देखने को मिला है. इससे ज्यादा फसलों को नुकसान राजस्थान में हुआ है. इन 6 राज्यों में राजस्थान समेत दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और पंजाब भी शामिल हैं. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक किसान मॉनसून के मौसम में लगभग 106 मिलियन हेक्टेयर में चावल, विभिन्न प्रकार के दाल, गन्ना, सोयाबीन और कपास की खेती करते हैं. Also Read - Rajasthan: देर रात 46 IAS, 37 IPS और 9 IFS अफसरों के हुए ट्रांसफर, देखें List, भष्‍टाचार के आरोपी को कम‍िश्‍नर बनाया

इस बाबत कृषि मंत्रालय ने कहा कि बारिश के बाद रेगिस्तानी टिड्डियों के झुंड आमतौर पर उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में पाए जाते हैं. क्योंकि इनका ब्रीडिंग सेंटर यहीं होता है. ये बाद में प्रजनन के लिए पाकिस्तान से होते हुए भारत में प्रवेश में करते हैं. इसी कड़ी में 30 अप्रैल को राजस्थान और पंजाब में रेगस्तानी टिड्डों के झुंड के बारे में जानकारी मिली थी. मंत्रालय ने आगे कहा कि गुलाबी अपरिपक्व व्यस्क टिड्डों को झुंड उची उड़ान भरते हैं. इस कारण पाकिस्तान की तरफ से चलने वाली तेज हवाओं के चलते ये लंबी दूरी तय करते हैं. Also Read - जयपुर: प्रेमिका के पति को अचानक देख शख्स ने 5वें फ्लोर से लगा दी छलांग, अस्पताल में हुई मौत

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक रेगिस्तानी टिड्डियों और गुलाबी व्यस्क टिड्डों के कारण 11 मई तक राजस्थान और पंजाब के 14,299 हेक्टेयर में उगे फसलों को नुकसान पहुंचा है. वहीं जनवरी महीने में गुजरात में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला था. यहां पिछले 25 सालों में पहली बार हुआ जब टिड्डियों के झुंड के कारण लगभग 25,000 हेक्टेयर में उगे गेहूं, जीरा और आलू की कम से कम 75 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई थीं.