नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बतौर पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा को लुटियन दिल्ली में एक ही सरकारी आवास रखने की अनुमति देते हुए, उनसे दूसरा आवास खाली करने के लिए कहा है. आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने नियमों का हवाला देकर पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में देवगौड़ा को एक ही सरकारी बंगले का हकदार बताया है.

उल्लेखनीय है कि 16वीं लोकसभा के दौरान वरिष्ठ सांसद के तौर पर देवगौड़ा को सरकारी बंगला आवंटित किया गया था. हालांकि, 17वीं लोकसभा का चुनाव हारने के बाद पूर्व सांसदों से सरकारी बंगला खाली कराने की प्रक्रिया के तहत देवगौड़ा को भी मंत्रालय के संपदा निदेशालय ने गत सितंबर में बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया था.

सूत्रों के अनुसार इस नोटिस के जवाब में देवगौड़ा ने पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में खुद को लुटियन दिल्ली में सरकारी आवास का हकदार बताते हुए, उन्हें सफदरजंग लेन स्थित बंगले का आवंटन बरकरार रखने का अनुरोध किया था. निदेशालय ने उनके इस अनुरोध को तो स्वीकार कर लिया, लेकिन प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्हें कार्यालय के उपयोग के लिए वीपी हाऊस में आवंटित किया गया आवास खाली करने को कहा है.

निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नियमानुसार पूर्व प्रधानमंत्री सिर्फ एक ही सरकारी आवास (टाइप 7) के हकदार हैं. लिहाजा देवगौड़ा को दूसरा आवास छोड़ने के लिए कहा गया है. समझा जाता है कि देवगौड़ा ने निदेशालय की इस दलील को स्वीकार कर जल्द ही वीपी हाऊस स्थित आवास खाली करने का लिखित आश्वासन दिया है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक 24 अक्टूबर तक सरकारी बंगला नहीं छोड़ने वाले पूर्व सांसदों की संख्या लगभग 25 थी. इनमें पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव से बीआर मेहता लेन स्थित बंगला पुलिस की मदद से गुरुवार को बलपूर्वक खाली कराया गया.

इसके अलावा पप्पू यादव की पत्नी और पूर्व सांसद रंजीत रंजन तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री शिबू सोरेन ने निदेशालय को बंगला जल्द छोड़ने का लिखित आश्वासन दिया है. सोरेन को नॉर्थ एवेन्यू स्थित 224 और 225 नंबर के दो बंगले और रंजन को बी आर मेहता लेन में सात नंबर बंगला आवंटित किया गया था.

(इनपुट-भाषा)