मुंबई। भारतीय जनता पार्टी को हालिया उपचुनावों में मिली करारी हार का असर अब दिखने लगा है. हार के बाद बीजेपी में मंथन का दौर शुरू है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने सोमवार को भाजपा के पदाधिकारियों से अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पूर्व शिवसेना से गठबंधन की कोशिश करने का आग्रह किया.

पालघर में थे आमने-सामने

राज्य सरकार में साझीदार दोनों दल 28 मई को पालघर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ उतरे थे और दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली थी. भाजपा प्रत्याशी राजेन्द्र गावित ने शिवसेना के श्रीनिवास वनागा को 29,572 मतों से पराजित किया. शिवसेना ने आरोप लगाया था कि ईवीएम में गड़बड़ी के चलते बीजेपी की जीत हुई है. उन्होंने सीधे चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करते हुए कोर्ट जाने तक की बात कही थी.

भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख रावसाहब दानवे ने संवाददाताओं से कहा, फडणवीस ने पार्टी की राज्य इकाई के पदाधिकारियों को शिवसेना के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन की कोशिश करने को कहा है. उन्होंने हालांकि यह भी कहा है कि अगर इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होती है तो हमें अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी करनी चाहिए.

पालघर और भंडारा-गोंदिया उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की रणनीति बनाने के लिए आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने पदाधिकारियों से यह बात कही. फडणवीस ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी पार्टियों के एकजुट होने से घबराएं नहीं.

एक साल से संग्राम जारी

पिछले करीब एक साल से बीजेपी-शिवसेना में संग्राम जारी है. शिवसेना ने अपने कड़े तेवर दिखाते हुए कथित ईवीएम गड़बड़ी हर मुद्दे पर विपक्ष का साथ दिया. कई बार केंद्र और राज्य सरकार से अलग होने की भी धमकी दी. पालघर में अलग उम्मीदवार उतारकर बीजेपी को झटका देने की भी कोशिश की. अगर हालात ऐसे ही रहें तो 2019 में दोनों पार्टियों खासकर बीजेपी को तगड़ा नुकसान हो सकता है.