नई दिल्ली: विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले एक और बड़ी उथल पुथल सामने आई है. जिन अजित पवार की दम पर बीजेपी ने रातों रात सरकार बनाकर सबको चौंका दिया था, उनके इस्तीफा देने बाद महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया है. विधानसभा में बुधवार को फ्लोर टेस्ट होना है. इस दौरान बीजेपी के सामने बहुमत साबित करने की बड़ी चुनौती थी. माना जा रहा है कि अब महाराष्ट्र में कांग्रेस एनसीपी और शिवसेना की सरकार तय है.

कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना तीनों दल लगातार दावा करते आ रहे हैं कि उनके पास बहुमत का आंकड़ा है और फ्लोर टेस्ट होने पर वह इसे साबित कर सरकार बनाएंगे. महाराष्ट्र में गुपचुप तरीके से सरकार बनाने का ये मामला सुप्रीम कोर्ट में था. दो दिन की सुनवाई के बाद आज ही सुप्रीम कोर्ट ने 27 नवंबर को फ्लोर टेस्ट कराए जाने का फैसला सुनाया था. एनसीपी नेता अजित पवार ने बीजेपी को ये कहते हुए समर्थन दिया था कि एनसीपी के अधिकतर विधायक मेरे साथ हैं. अजित पवार द्वारा दी गई 54 विधायकों की लिस्ट के बल पर ही महाराष्ट्र में आनन-फानन बीजेपी की सरकार भी बन गई थी.

देवेंद्र फडणवीस ने इस्तीफा देते हुए कहा कि अजित पवार ने मुझे इस्तीफा भेज दिया है, इसलिए हमारे पास कुछ बचा नहीं है. देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि शिवसेना ने पहले दिन ही मोलभाव किया था. हमारे पास बहुमत नहीं है, इसलिए मैंने इस्तीफा दिया है. 3 पहियों वाली सरकार चलाना मुश्किल था. हमने शिवसेना से 50-50 फॉर्मूले पर सरकार बनाने का कोई वादा नहीं किया था. फडणवीस ने कहा कि हम विपक्ष में बैठेंगे और नई सरकार को काम करना सिखाएंगे. हमने 5 साल बहुत मेहनत से काम किया.

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22 नवंबर की रात गुपचुप तरीके से महाराष्ट्र में बीजेपी ने सरकार ली थी. रात 12 बजे के बाद से चले घटनाक्रम में राज्य से राष्ट्रपति शासन भी हटा दिया गया था. और 23 नवंबर की सुबह देवेंद्र फडणवीस ने सीएम पद की शपथ भी ले ली थी. एनसीपी से बगावत करके बीजेपी को समर्थन देने वाले अजित पवार को डिप्टी सीएम बनाया गया था. अजित पवार ने 54 विधायकों की लिस्ट सौंपी थी. दावा था कि लगभग सभी एनसीपी विधायक उनके साथ हैं. इस आधार पर राज्यपाल ने बीजेपी की सरकार बनवा दी थी. जबकि एक दिन पहले तक शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी सरकार बनाने की योजना बना रहे थे, इसी बीच सुबह जब सब सोकर उठे तब तक बीजेपी की सरकार भी बन चुकी थी. महाराष्ट्र की सियासत में अचानक आए इस तूफ़ान ने सभी को सकते में डाल दिया था.

महाराष्ट्र में गुपचुप तरीके से सरकार बनाने के मामले को लेकर 23 नवंबर को ही कांग्रेस एनसीपी और शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया था. सुप्रीम कोर्ट में दो दिन तक इस मामले की सुनवाई चली. 24 नवंबर को रविवार होते हुए भी इस मामले की सुनवाई हुई थी. 25 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज 26 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार यानी 27 नवंबर को फ्लोर टेस्ट कराए जाने का फैसला सुनाया.

27 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होना है, जिसमें बीजेपी के सामने बहुमत साबित करने की बड़ी चुनौती थी. ऐसा इसलिए भी क्योंकि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के पास बहुमत का आंकड़ा दिख रहा है. इन तीनों दलों ने अपने विधायकों को मुंबई के अलग अलग फाइव स्टार होटल में रखा है. सोमवार की शाम इन तीनों दलों के 162 विधायक एक साथ फोटो सेशन कराते नजर आए थे. इस दौरान शपथ ली गई थी कि इनमें से कोई भी किसी भी कीमत पर बीजेपी का साथ नहीं देंगे.