नई दिल्ली: नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने केबिन क्रू सदस्यों के लिए उड़ान ड्यूटी के समय और आराम के घंटों के बारे में नियम तय कर दिए हैं. इसमें लंबी उड़ान पर अधिकतम ड्यूटी 22 घंटे तय की गई है. नए नियम दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बनाए गए हैं. इनमें कहा गया है कि किसी आकस्मिक परिचालन परिस्थिति में उड़ान समय में अधिकतम डेढ़ घंटे की वृद्धि की जा सकती है और ड्यूटी की अवधि चार घंटे बढ़ाई जा सकती है. Also Read - दिल्ली सरकार को हाईकोर्ट का झटका, निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए 80% ICU बेड रिजर्व रखने के आदेश पर रोक

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वरिष्ठ केबिन क्रू सभी केबिन क्रू सदस्यों के साथ विचार विमर्श के बाद उड़ान के परिचालन के लिए ‘पायलट इन कमांड’ से अपनी इच्छा जताएगा. डाइवर्जन की स्थिति में उड़ान को पूरा करने के लिए सिर्फ एक अतिरिक्त लैंडिंग की अनुमति होगी. ये नियम इस साल एक नवंबर से लागू होंगे.

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नियमों में कहा गया है कि आकस्मिक परिचालन परिस्थितियों में मौसम, प्राकृतिक आपदा, चिकित्सा आपात स्थिति, राहत और बचाव कार्य के लिए राष्ट्रीय जरूरत, उपकरण में खराबी, हवाई पट्टी का बंद होना आदि शामिल हैं, जो कि आपरेटर के नियंत्रण से बाहर हैं.

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इन नियमों में स्पष्ट किया गया है कि एयरलाइन को ऐसे केबिन क्रू सदस्य को उड़ान पर ड्यूटी के लिए नहीं कहा जाना चाहिए जिसके बारे में यह जाना जाता हो कि वह इतना अधिक थक जाता है जिससे उड़ान की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.

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नए नियम एक एनजीओ और कुछ केबिन क्रू सदस्यों की उस याचिका के बाद आए है जिसमें 2016 के नियमों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी. याचिका में दलील दी गई थी कि ये नियम बनाते समय केबिन क्रू सदस्यों को ड्यूटी की वजह से होने वाली थकान और उनके आराम के समय को शामिल नहीं किया गया है.