नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के बीच केरल के लोगों को राज्य सरकार से थोड़ी राहत मिली है. केरल सरकार ने पेट्रोल के दाम एक रुपये घटा दिए हैं. केरल सरकार के इस फैसले का केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वागत किया है. प्रधान ने कहा कि केरल ने पेट्रोल के दाम एक रुपये घटाकर अच्छा काम किया है. सभी राज्यों, चाहे वो बीजेपी शासित राज्य क्यों ना हो, तेल के दाम घटाने पर विचार करना चाहिए. लेकिन हर राज्य की अपनी प्राथमिकताएं और जिम्मेदारी होती है.

धर्मेंद्र प्रधान ने जताया शुक्रिया

प्रधान ने कहा कि आपको बताना चाहूंगा कि केरल उन राज्यों में शामिल है जहां तेल पर सबसे ज्यादा टैक्स लगता है. जब हमने तेल के दामों में कटौती की बात कही थी तो वहां के वित्त मंत्री ने नेगेटिव कमेंट दिये थे, लेकिन अब उन्होंने जिम्मेदारी ली है. इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद करता हूं.

महज एक रुपये की कटौती

बता दें कि पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर देश में बहस का दौर जारी है. तेल कंपनियों ने लगातार 15 दिन तक तेल के दाम बढ़ाए जिससे सवाल सरकार पर उठने लगे. बुधवार को 16वें दिन सुबह खबर आई कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 60 पैसे और डीजल के दाम में 56 प्रति लीटर की कमी की है. लेकिन कुछ देर बाद सफाई दी गई कि कटौती 60 और 56 पैसे की नहीं बल्कि 1 पैसे की हुई है. कंपनियों ने टाइपिंग एरर को गलतफहमी की वजह बताया. इसे लेकर तेल कंपनियों को खूब आलोचना हुई और बहस का दौर फिर गर्म हो गया.

तेल कंपनियों ने आज सुबह पेट्रोल की कीमत में 60 पैसा प्रति लीटर और डीजल में 56 पैसा प्रति लीटर कटौती करने की घोषणा की थी. इससे दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 77.83 रुपये और 68.75 रुपये प्रति लीटर हो गई थी. लेकिन इस घोषणा के कुछ घंटों के भीतर ही कंपनियों ने भूल सुधार करते हुए कहा कि दोनों की कीमत में मात्र एक पैसा प्रति लीटर ही कटौती की गई है.

देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियल ऑयल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कटौती एक पैसा की गई है लेकिन टाइपिंग एरर की वजह से 25 मई की कीमतों को आज की कीमत के तौर पर जारी कर दिया गया था.

दिल्ली में अब इतनी कीमत

अब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 78.42 रुपये प्रति लीटर और डीजल की 69.30 रुपये प्रति लीटर हो गई है. ईंधन की कीमतों में यह कटौती सीधे 16 दिन बाद हुई है, क्योंकि 14 मई से इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही थीं. उससे पहले कर्नाटक चुनाव के चलते 19 दिन तक ईंधन की कीमतें स्थिर रहीं थी जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं.